नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) नई दिल्ली की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जारी की गई एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स ने राजस्थान के भावी डॉक्टरों को बड़ा झटका दिया है। एनएमसी ने देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सरकारी एमबीबीएस सीटों की संख्या तो बढ़ाई हैं, लेकिन क्षेत्रफल के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में सरकारी कॉलेजों में एक भी सीट नहीं बढ़ाई। एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा बताते हैं कि राजस्थान के 33 सरकारी मेडिकल संस्थानों में पूर्व की भांति कुल 4,480 एमबीबीएस सीटें यथावत रखी गई हैं। इस तरह देश की कुल सरकारी एमबीबीएस सीटों में राजस्थान की भागीदारी महज 7 प्रतिशत पर रह गई है। वर्तमान में देश में 441 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ एमबीबीएस सीटों का आंकड़ा 63,296 तक पहुंच चुका है। इसके उलट राजस्थान के 15 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में रिकॉर्ड 900 सीटों की बढ़ोतरी हुई है। निजी मेडिकल संस्थानों की 3600 सहित राजस्थान में कुल सीटों की संख्या 8080 हो गई है। उदयपुर में भी 6 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों की संख्या 1150 में 200 की बढ़ोतरी की गई, जिससे यह सीटें बढ़कर अब 1350 हो गई हैं। पेसिफिक उमरड़ा में सीटों की संख्या 150 से 250 और अनंता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर में 150 से सीटों की संख्या 200 हो गई हैं। रीनीट : स्क्रूटनी के लिए भेजी अधिकांश ओएमआर शीट्स जाली व एआई जनरेटेड एनटीए द्वारा री-नीट यूजी-2026 की ओएमआर शीट्स व प्राप्तांकों की विसंगतियों की गहन जांच के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। एनटीए ने चेतावनी दी है कि शिकायत के लिए भेजी जा रही अधिकांश ओएमआर शीट्स जाली या एआई जनरेटेड हैं। एनटीए ने छात्रों व अभिभावकों से जांच के लिए केवल ओरिजिनल ओएमआर शीट ही प्रस्तुत करने का आग्रह किया है। फर्जी दस्तावेज भेजने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की बात कही है। यह जालसाजी प्रवेश प्रक्रिया को बाधित करने की नीयत से की जा रही है, जो वास्तविक पीड़ितों के साथ अन्याय व क्वालिफाइड 11.21 लाख विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।