महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल परिसर में संचालित टीबी क्लीनिक आज खुद संक्रमण का एक भयानक केंद्र बन चुका है। यहां रोजाना 40 से 50 नए टीबी मरीज ओपीडी में इलाज और दवा लेने पहुंचते हैं, लेकिन हवा के जरिए फैलने वाली इस बेहद घातक और संक्रामक बीमारी के केंद्र पर संक्रमण रोकने के बुनियादी सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नदारद हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि क्लीनिक में न तो हवा को शुद्ध करने वाले हेपा फिल्टर लगे हैं और न ही बैक्टीरिया को खत्म करने वाली यूवी-सी रेज मशीनें। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ-साथ हर वक्त ड्यूटी पर तैनात दो सीनियर डॉक्टर, जिला टीबी अधिकारी और पैरामेडिकल स्टाफ भी हाई रिस्क पर हैं। दूसरी ओर टीबी हॉस्पिटल बड़ी की बात की जाए तो बीते 14 वर्षों में यहां संक्रमण की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस अवधि में 4 लाख 12 हजार से अधिक ओपीडी और 1 लाख 5 हजार से ज्यादा भर्ती मरीजों (आईपीडी) के बीच कुल 3,648 मरीजों की मौत हो चुकी है। सेंट्रल टीबी डिविजन, नई दिल्ली की टीम ने तीन महीने पहले बड़ी टीबी अस्पताल में तो 72 सुरक्षा मशीनें लगवा दीं, लेकिन शहर के बीचों-बीच स्थित संवेदनशील टीबी क्लीनिक को बजट के अभाव में भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। अधिकारी अब भी फंड का इंतजार कर रहे हैं। क्या हैं हेपा फिल्टर व यूवी-सी मशीनें, क्लीनिक में क्यों है इनकी जरूरत? बड़ी में मशीनें लगाईं, एमबी में नजरअंदाजी सूत्रों के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले टीबी हॉस्पिटल बड़ी में टीबी डिविजन, नई दिल्ली की एक उच्च स्तरीय टीम ने उदयपुर का दौरा किया था। टीम ने बड़ी स्थित मुख्य टीबी हॉस्पिटल का गहन निरीक्षण किया और वहां संक्रमण रोकने के कड़े निर्देश दिए। इसके बाद बड़ी अस्पताल के वार्डों और संवेदनशील गलियारों में तो तुरंत 72 यूवी-सी रेज मशीनें इंस्टॉल कर दी गईं, जिससे वहां का स्टाफ और मरीज सुरक्षित हो गए। लेकिन इसके ठीक विपरीत, शहर के सबसे व्यस्त केंद्र एमबी टीबी क्लीनिक को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। जब भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि अधिकारियों के पास इन जरूरी मशीनों को खरीदने के लिए बजट ही नहीं है। “बड़ी टीबी अस्पताल के प्रभारी डॉ. मनोज आर्य का कहना है कि दिल्ली की टीम के निर्देश पर बड़ी में व्यवस्था हो चुकी है और शहर के क्लीनिक में भी यह तुरंत होनी चाहिए। वहीं, जिला टीबी अधिकारी डॉ. प्रणव भावसार ने दलील दी कि बजट की स्वीकृति मिलते ही सबसे पहले हेपा फिल्टर और यूवी-सी लैंप लगाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”