भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा समय के साथ बढ़ती जरूरतों और चुनौतियों के बीच भीलवाड़ा में न्याय व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। भोपालगंज क्षेत्र के सब्जी मंडी इलाके में स्थित हेरिटेज न्यायालय भवन पिछले 77 वर्षों से लगातार न्याय सेवा दे रहा है। यहां वर्ष 1941 और 1947 तक के रिकॉर्ड आज भी सुरक्षित हैं, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं। स्वतंत्रता के बाद 1948 से 1950 के बीच हीरालाल करणपुरिया ने प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला। तब से अब तक 52 न्यायाधीश यहां सेवाएं दे चुके हैं और वर्तमान में अभय जैन इस पद पर कार्यरत हैं। ब्रिटिश काल में इस न्यायालय को ‘जूनावास कचहरी’ के नाम से जाना जाता था, जहां प्रशासनिक और न्यायिक कार्य एक ही परिसर में संचालित होते थे। उसी समय यहां न्यायिक अभिरक्षा के लिए ‘गुलमंडी जेल’ का निर्माण किया था। इसके पास ही फांसी घर भी था, जो उस दौर की कठोर न्याय व्यवस्था को दर्शाता है। शहर के व्यस्त भोपालगंज क्षेत्र में यह परिसर ऐसे स्थान पर संचालित हो रहा है, जहां ट्रैफिक का अत्यधिक दबाव और अव्यवस्था बनी रहती है। अधिवक्ताओं के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, चैंबरों का अभाव है। परिसर के तीनों ओर की सड़कों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और पक्षकारों को परेशानी होती है। समीप स्थित कलेक्टर कार्यालय के बाहर होने वाले आंदोलन, नारेबाजी और जुलूस भी न्यायिक कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करते हैं। कई महत्वपूर्ण न्यायालय अब मुख्य परिसर के बाहर संचालित हो रहे हैं। पॉक्सो कोर्ट संख्या 1 एवं 2, एनआई कोर्ट संख्या 1 और 2 सब्जी मंडी क्षेत्र एवं किराए के भवनों में संचालित हैं। वहीं एनआई कोर्ट संख्या 3, 4 और 5 भी परिसर से बाहर किराए के भवनों में चल रहे हैं।