जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग का दावा करने वाला सीएमएचओ कार्यालय खुद अपनी ही व्यवस्थाओं पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा। राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के उद्देश्य से उप स्वास्थ्य केन्द्रों को क्रमोन्नत कर 8 नई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) तो बना दीं, लेकिन इन पीएचसी पर दवा वितरण व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित है। हालत यह है कि एक महीने में 3 हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचे, लेकिन ई-औषधि सिस्टम में दवा वितरण का रिकॉर्ड शून्य है। यानी मरीजों को कौन सी दवा दी गई, कितनी दी गई और कितनों को नहीं मिली, इसका कोई ऑनलाइन लेखा-जोखा ही नहीं रखा जा रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राज्य सरकार ने नि:शुल्क दवा वितरण में पारदर्शिता और स्टॉक मॉनिटरिंग के लिए ई-औषधि सिस्टम लागू किया हुआ है, तो नई पीएचसी पर यह सिस्टम आखिर कागजों तक ही क्यों सीमित है? यह स्थिति सीधे तौर पर सीएमएचओ कार्यालय की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े कर रही है। जिले की नई पीएचसी पर ऑफलाइन तरीके से दवा वितरण किया जा रहा है। 3000 से ज्यादा मरीज पहुंचे, दवा वितरण में रिकॉर्ड किसी का नहीं ब्लॉक की अटारी पीएचसी पर मार्च 2026 में 735 मरीजों की ओपीडी रही, लेकिन दवा वितरण की एक भी ऑनलाइन एंट्री नहीं हुई। इसी तरह बरोलीरान पीएचसी पर 479, रूपवास की बसई पीएचसी पर 350, नदबई की बीलौठ पीएचसी पर 315, सेवर की हथैनी पीएचसी पर 380, इकरन पीएचसी पर 411, फुलवारा पीएचसी पर 202 और सुनारी पीएचसी पर 260 मरीज पहुंचे, लेकिन सभी जगह रिकॉर्ड शून्य रहा। कुल मिलाकर इन 8 पीएचसी पर 3132 मरीजों की ओपीडी हुई, जबकि ई-औषधि पोर्टल पर दवा वितरण की एक भी एंट्री दर्ज नहीं है। अनियमितता की आशंका बढ़ी स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि ई-औषधि सिस्टम का उद्देश्य दवा वितरण में पारदर्शिता बनाए रखना और दवाओं के स्टॉक की निगरानी करना है। लेकिन जब मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की एंट्री ही नहीं होगी, तो यह पता ही नहीं चलेगा कि दवा का वास्तविक उपयोग कितना हुआ। इससे दवा स्टॉक, मांग और आपूर्ति की पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है और अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ जाती है। जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। “जिले की पीएचसी पर ई-औषधि पोर्टल पर ओपीडी मरीजों के दवा पर्चों की ऑनलाइन एंट्री नहीं होने के मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी कार्मिक या अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।” - डॉ. गौरव कपूर, सीएमएचओ भरतपुर