देश के सबसे विशाल गंगा मंदिर का 89 साल बाद रिनोवेशन हो रहा है। संयोग यह है कि इस मंदिर का निर्माण भी 92 साल में हुआ था। जिस पर करीब 7 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसमें मंदिर का शिखर और मुख्य द्वार बनाया जाएगा शिखर व मुख्य द्वार को अयोध्या राम मंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा ने डिजाइन किया है। इसका पिछले दिनों शिलान्यास हो चुका है और मार्च 2027 तक काम होने की संभावना है। शिखर और मुख्य गेट को गंगा मंदिर के प्राचीन पत्थरों से मैच करने वाले बंशी पहाड़पुर के बलुआ/सेंड स्टोन से बनाया जाएगा। पत्थर मैच हो गया है। इस कारण नए निर्माण की पुराने स्थापत्य से समानता रहेगी। राज्य सरकार ने पिछले बजट में भरतपुर के गंगा मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए बजट में इसके शेष निर्माण कराने की योजना बनाई। निर्माण एजेंसी भरतपुर विकास प्राधिकरण है। गंगा मंदिर का निर्माण 1845 में तत्कालीन महाराजा बलवंत सिंह ने अपनी इष्ट देवी गंगा जी का मंदिर बनवाना प्रारंभ किया था। यह 275 गुणा 275 फीट का है, जिसमें यूरोपियन और द्रविड़ शैली का स्थापत्य है। माना जाता है कि इस शैली का यह एक मात्र मंदिर है। इसकी प्रस्तावित ऊंचाई 110 फीट डिजाइन की गई थी, किंतु किन्हीं कारणों से शिखर और मुख्य गेट नहीं बन पाया था और 1937 में तत्कालीन महाराजा ब्रजेंद्र सिंह ने मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई। इन नौ दशकों में कई बार इस अधूरे काम को पूरा कराए जाने की मांग उठी, लेकिन अब काम हो पा रहा है। गंगा अतीत एवं वर्तमान पुस्तक में रियासतकाल में मंदिर के प्रस्तावित शिखर और प्रवेश द्वार का डिजाइन दिया है। पूर्व में बारहदरी के बीच पूर्व और पश्चिम की छतों पर इसकी डिजाइन उकेरी गई थीं। जल्द ही मंदिर नए स्वरूप में दिखाई देगा। मंदिर में अब यूरोपियन, द्रविड़ और नागर शैलियों का दिखेगा संगम 1. शिखर... नागर शैली में 50 फुट का बनेगा मंदिर में कक्कइया ईंटों का शिखर अधूरा छोड़ दिया गया था। करीब 25 साल पहले इस पर बलुआ पत्थर जड़ दिए गए थे, लेकिन अब प्राचीन प्रस्तावित डिजाइन के अनुसार ही शिखर बनाया जाएगा। यह नागर शैली में डिजाइन है। यानी अब मंदिर तीन शैली—यूरोपियन, द्रविड़ और नागर शैली का युग्म हो जाएगा। इसके अलावा मंदिर में गंगाजल रखने के लिए एक हौद का भी निर्माण कराया जाएगा। 2. प्रवेश द्वार... 40 फीट का बनेगा, जिसमें शंकर भगवान की मूर्ति होगी मंदिर के प्रवेश द्वार को 40 फीट ऊंचाई का बनाया जाएगा, जिसमें मां गंगा के धरती अवतरण पर वेग को धारण करने वाले भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। गेट 44 फीट चौड़ा होगा, जिसमें मेन गेट 24 फीट तथा दस-दस फीट के दो साइडों में गेट होंगे। इसके अलावा दोनों ओर दो प्रसाद कक्ष भी बनेंगे। इसके अतिरिक्त मंदिर में रसोई का भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा। “गंगा मंदिर की ऐतिहासिकता को देखते हुए सौंदर्यीकरण एवं संरक्षण का काम चल रहा है। इसके तहत प्रवेश द्वार और शिखर का निर्माण होगा। इसके अलावा मंदिर के चारों ओर दुकानों को भी प्राचीन स्वरूप में लाया जा रहा है। अगले साल मार्च तक काम पूरा हो जाएगा।” - कनिष्क कटारिया, आयुक्त, बीडीए