द्वारकाधीश पाटोत्सव के तहत राष्ट्रीय साहित्य परिषद की ओर से सम्मान समारोह एवं विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के ख्यातनाम कवि गिरीश विद्रोही को स्वर्गीय फतेहलाल अनोखा की स्मृति में ‘अनोखा स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वहीं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पंडित मंगलमुखी आमेटा तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए हित्तिका शर्मा और ख्वाहिश सेन को परिषद की ओर से सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अफजल खान ‘अफजल’ ने की। मुख्य अतिथि समाजसेवी रामचंद्र पालीवाल (नाथद्वारा) तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. रचना तैलंग रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ दर्शन पालीवाल ने सरस्वती वंदना और द्वारकाधीश वंदना से किया। इसके बाद उन्होंने राजस्थानी गीत प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। राष्ट्रीय कवि गिरीश विद्रोही ने अपनी चर्चित राजस्थानी रचनाओं और मीरा पर आधारित गीतों की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। नीतू बाफना ने श्रृंगार रस की कविता सुनाई, जबकि सतीश आचार्य ने मोबाइल के बढ़ते प्रभाव पर व्यंग्यात्मक राजस्थानी गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। यशवंत शर्मा और डॉ. रचना तैलंग ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में रंग भर दिए। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सूर्य प्रकाश दीक्षित ने किया। उन्होंने अपने मुक्तकों से भी श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। समारोह में मारुति नंदन दत्तात्रेय संस्थान के अध्यक्ष महंत मंगलानंद महाराज, कार्यक्रम प्रभारी दिनेश पालीवाल, जेके टायर के महाप्रबंधक जितेंद्र सिंह यादव, कर्मचारी संघ के महामंत्री मोतीलाल कुमावत सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। अंत में परिषद अध्यक्ष हेमंत गुर्जर ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कवि सम्मेलन में गोपाल शर्मा ने हल्दीघाटी और चेतक पर आधारित वीर रस की रचना सुनाई। कृष्णकांत सांचीहर ने राजस्थान की वीरता का गुणगान किया, जबकि गौरव पालीवाल ने भक्ति रस से ओतप्रोत छंद प्रस्तुत किए। नरेंद्रसिंह रावल ने महाराणा प्रताप-चेतक और पन्ना धाय-चंदन संवाद पर आधारित गीतों से श्रोताओं को भावुक कर दिया।