अजमेर में गुरुवार को भगवान जगदीश, सुभद्राजी और बलभद्रजी की भव्य रथयात्रा आस्था, उल्लास और भक्तिभाव से निकली। जगदीशपुरी से जैसे ही भगवान का रथ रवाना हुआ, पूरा क्षेत्र ‘जय-जय जगन्नाथ स्वामी’ के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा। भगवान के दर्शन और रथ खींचने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब कई महिलाएं हाथों में झाड़ू लेकर भगवान के रथ के आगे-आगे मार्ग की सफाई करती चलीं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान के रथ के आगे सेवा करने का सौभाग्य जीवन का सबसे बड़ा पुण्य होता है। यात्रा के दौरान मोती डूंगरी गणेश, खाटूश्याम, श्री सांवरिया सेठ, राधा-कृष्ण और हनुमानजी के सजे-धजे रथ भी मुख्य रथयात्रा में शामिल हुए। नया बाजार पहुंचने पर अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और व्यापारियों ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। श्रद्धालु अपने-अपने सिंहासनों में लड्डू गोपाल और भगवान जगदीश के विग्रह सजाकर यात्रा में शामिल हुए। दरगाह क्षेत्र में भी रथयात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। जगह-जगह आरती, पुष्पवर्षा और जयघोष के बीच भगवान के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। देर रात रथयात्रा जनकपुरी पहुंचकर संपन्न हुई। करीब 800 किलो वजनी रथ को खींचने के लिए दोनों ओर लगभग 200-200 मीटर लंबे रस्से बांधे गए। एक ओर महिलाओं और दूसरी ओर पुरुषों ने रस्से थामकर भगवान का रथ खींचा। हर बार करीब 500 श्रद्धालुओं को बारी-बारी से रथ खींचने का सौभाग्य मिला। भगवान जगदीश, सुभद्राजी और बलभद्रजी के साथ रथ पर विराजमान वीर हनुमान के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते रहे।