अलवर जिले में सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आशा सहयोगिनियों ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया और रैली निकाली। कंपनी बाग से शुरू हुई यह रैली शहर के घंटाघर और काशीराम चौराहे से होते हुए भगत सिंह चौराहे के पास स्थित वन मंत्री संजय शर्मा के कार्यालय पहुंची। यहाँ आशा सहयोगिनियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मानदेय (सैलरी) बढ़ाने की मांग की। प्रदर्शनकारी आशा सहयोगिनियों ने कहा- हमारा आंदोलन पिछले एक महीने से लगातार जारी है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के विरोध में आज जिलेभर की आशा सहयोगिनियां एकजुट होकर सड़कों पर उतरीं और सरकार से जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की। आशा सहयोगिनी राजनंती ने कहा कि साल 2004 से लगातार सेवाएं देने के बावजूद आज भी उन्हें मात्र 4,959 रुपये का मासिक मानदेय मिल रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी से भी काफी कम है। इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। सरकार को मानदेय बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। अब देखिए, रैली से जुड़ी 2 PHOTOS… टीकाकरण से लेकर प्रसव तक का जिम्मा, फिर भी अधिकारों से वंचित आशा सहयोगिनियों ने कहा- आशा सहयोगिनियां सुबह से शाम तक सरकार की लगभग सभी स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सुरक्षित प्रसव, परिवार कल्याण और पोषण अभियान सहित अनेक योजनाओं का जिम्मा आशा सहयोगिनियों के कंधों पर है। इसके बावजूद उन्हें न तो सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है और न ही श्रमिक अधिकार दिए जा रहे हैं। कम शिक्षा के बावजूद ऑनलाइन काम का बोझ, न्यूनतम मजदूरी की मांग राजनंती ने कहा कि अधिकांश आशा सहयोगिनियां आठवीं तक ही शिक्षित हैं, लेकिन इसके बावजूद उनसे ऑनलाइन पोर्टल पर काम कराया जाता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त मानसिक और व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह पूरी जिम्मेदारियां निभवा रही है, तो उन्हें कम से कम न्यूनतम मजदूरी के बराबर मानदेय क्यों नहीं दिया जा रहा।