अलवर शहर के श्री जगन्नाथजी मेले का उत्साह रूपबास राजकीय विद्यालय के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भारी पड़ रहा है। मेला परिसर के भीतर ही संचालित इस स्कूल में करीब 96 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन उनके लिए केवल तीन कमरे हैं। मेले के दौरान इनमें से तीनों कमरों का उपयोग पुलिस प्रशासन मॉनिटरिंग और ड्यूटी के लिए करता है। इसके चलते स्कूल में तीन दिन अतिरिक्त अवकाश घोषित करना पड़ता है। एक दिन कलेक्टर पावर से अवकाश और बीच में रविवार मिलाकर कुल पांच दिन की आधिकारिक छुट्टियां हो जाती हैं। वहीं टीचर्स का कहना है कि मेले के शोर और कम उपस्थिति के कारण करीब 9 से 10 दिन तक पढ़ाई प्रभावित रहती है। एक कमरे में चलती हैं कई क्लास आठवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र ने बताया कि छुट्टियों और लगातार बाधित हो रही कक्षाओं से उनका सिलेबस पीछे रह जाता है। पहले से ही एक कमरे में दो-दो और कई बार तीन-तीन कक्षाएं लगती हैं, जबकि कभी बरामदे और पेड़ के नीचे भी पढ़ाना पड़ता है। ऐसे में पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता और चैप्टर समय पर पूरे नहीं हो पाते। सिलेबस भी पूरा नहीं होता छात्र आलोक शर्मा ने बताया कि एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई होने से शिक्षकों की आवाज आपस में टकराती है, जिससे पढ़ाई पर असर पड़ता है। ऊपर से मेले के कारण छुट्टियां होने से सिलेबस पूरा करना और मुश्किल हो जाता है। विद्यालय की प्रधानाचार्य दीपा शर्मा ने बताया कि हर वर्ष मेले के दौरान पुलिस प्रशासन स्कूल के कमरों का उपयोग करता है। तीन दिन कक्षाएं प्रभावित होती हैं। एक दिन कलेक्टर पावर से अवकाश और बीच में रविवार होने से कुल पांच दिन की छुट्टियां हो जाती हैं। जो पाठ्यक्रम छूटता है, उसे बाद में अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर पूरा कराया जाता है। स्कूल की चारदीवारी कई जगह से टूटी बच्चों और शिक्षकों के अनुसार मेले की शुरुआत होते ही स्कूल में उपस्थिति भी घट जाती है। कई अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते क्योंकि स्कूल की चारदीवारी कई जगह से टूटी हुई है और बच्चों के मेले की ओर चले जाने की आशंका रहती है। शिक्षकों का कहना है कि आधिकारिक रूप से पांच दिन का अवकाश रहता है, लेकिन मेले के शोर और कम उपस्थिति के कारण वास्तविक रूप से 9 से 10 दिन तक पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यालय में पहले अतिरिक्त कमरे थे, जिन्हें करीब तीन वर्ष पहले जर्जर होने के कारण हटाया गया था। नए कमरे अब तक नहीं बनने से 96 विद्यार्थियों की पढ़ाई केवल तीन कमरों में संचालित हो रही है, जिससे पूरे साल शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित रहती है।