अन्नपूर्णा रसोई जहां 8 रुपए में गरीब को भरपेट भोजन मिलना था, वही अब करोड़ों के खेल का अड्डा बन गई है। भास्कर की 40 दिन की पड़ताल में सामने आया कि यहां एक ही व्यक्ति को एक ही दिन में 8 से 21 बार तक खाना खिलाया दिखाया जा रहा है। रिकॉर्ड में कहीं 15 सेकंड के अंतर में नाम बदलकर लंच-डिनर दर्ज है, तो कहीं एक व्यक्ति ने दिनभर में 12 किलो से ज्यादा भोजन खा लिया। रसोई संचालकों ने 20-25 लोगों को तय कर रखा है, जो सिर्फ फोटो खिंचवाने आते हैं। उन्हीं की तस्वीरों को अलग-अलग नामों से सिस्टम में अपलोड कर दिया जाता है। खराब क्वालिटी के कारण असली जरूरतमंद लोग आ ही नहीं रहे, लेकिन कागजों में हजारों थालियां दिखाकर सरकार के अनुदान की बंदरबाट की जा रही है। भूखा सिस्टम; नाम अलग, फोटो एक, 3 दिन में 76 थालियां: 6 के नाम पर बना ‘भोजन का रिकॉर्ड’ 1 जनवरी : सेकंडों में 9 बार खाना ‘खा गया’ राजेश 10:10:23 बजे राजेश के नाम लंच 10:10:39 बजे (16 सेकंड) मोकेश के नाम लंच 10:21:17 बजे फिर लंच, 11:11:58 बजे मुकेश के नाम लंच 19:43:52 बजे रामकेश के नाम डिनर 19:44:11 बजे मोकेश के नाम 20:23:47 बजे मोकेश के नाम 20:24:07 बजे (20 सेकंड बाद) मुकेश के नाम 20:41:39 बजे डिनर। राजेश/रामकेश के नाम 9 पर्ची 61 मिनट में 6 बार लंच...10:16:22 बजे रामकेश लंच 10:16:39 बजे (17 सेकंड बाद) लंच 10:16:58 बजे (19 सेकंड) राजेश के नाम लंच 10:29:19 बजे राम के नाम 10:30:25 बजे (1 मिनट बाद) मोहन के नाम 11:17:28 बजे कालू के नाम 19:54:20 बजे, 20:35:21 बजे, 20:35:35 बजे (14 सेकंड बाद), 20:47:56 बजे डिनर। महेश ने 18 बार खाना खाया...सुबह: 10:15:01 से 11:25:30 के बीच 8 बार लंच, कई एंट्री 13-20 सेकंड के अंतर में रात: 19:51:34 से 20:46:29 के बीच 10 बार डिनर, हर 15-20 सेकंड में नाम बदला। 2 जनवरी: 30 सेकंड में दो बार रामकेश की पर्ची कटी 09:11:46 बजे रामकेश लंच, 09:12:16 बजे फिर लंच, 09:25:51 बजे राजेश के नाम, 09:26:46 बजे मोकेश के नाम, 10:31:52 बजे लाला के नाम, 19:07:01 बजे राजेश के नाम, 19:07:14 बजे (13 सेकंड बाद) रितिक के नाम। 3 जनवरी : राजेश ने 21 बार खाने का रिकॉर्ड बनाया सुबह 09:58:44 से 13:04:02 के बीच 11 बार लंच, कई एंट्री 15-30 सेकंड में, शाम 17:42:21 से 18:45:14 के बीच 10 बार डिनर। 21 बार भोजन किया। डिजिटल रिकॉर्ड पर सवाल - एक ही चेहरे की बार-बार एंट्री कैसे पास हो रही है, पर अलर्ट क्यों नहीं? “अन्नपूर्णा रसोई में व्यवस्थाएं ठीक हैं, हम समय समय पर औचक निरीक्षण करवाते रहते हैं। अभी तक तो कुछ ऐसा मिला नहीं। कई प्रकरणों की जांच चल भी रही है, कार्रवाई का अधिकार कमेटी या कलेक्टर के पास है।” -नरेंद्र बंसल, अतिरिक्त आयुक्त, जयपुर नगर निगम