सिंगल यूज प्लास्टिक पर सरकार के प्रतिबंध का गांवों में असर नजर नहीं आ रहा। कस्बे सहित गऊघाट, बड़ोरा, किशनपुरा, रिछंदा, कटावर, बिछालस, सुभाषपुरा, नोहल्या, खानपुरिया, अचरावा, करजूना व अन्य गांवों में पॉलीथिन कैरीबैग का इस्तेमाल खुलेआम जारी है। बाजारों में दुकानों, सब्जी विक्रेताओं के यहां बिना रोक-टोक पॉलीथिन का उपयोग किया जा रहा है। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कागज के थैले, कपड़े के बैग की अपेक्षा प्लास्टिक कैरी बैग सस्ते पड़ते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिबंध के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं हो रही हैं। गांवों में नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा। कार्रवाई भी नजर नहीं आती। दुकानदारों, सप्लायर्स में डर नहीं है। पॉलीथिन के बढ़ते उपयोग से जगह-जगह नालियां चोक हो रही हैं। खुले में घूमने वाले मवेशी भी खाद्य पदार्थ के साथ प्लास्टिक निगल रहे हैं। इससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में समस्या कई गुना बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पॉलीथिन रोकनी है तो पहले सस्ता विकल्प उपलब्ध कराया जाए। प्रतिबंध को असरदार बनाने के लिए नियमित निगरानी, कार्रवाई जरूरी है।