जिले के अंतिम छोर तक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का चार दिवसीय विशेष सघन अभियान जारी है। अभियान के दूसरे दिन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ खुद पहाड़ी और दुर्गम इलाके में पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेने निकले। वे डेरी उप स्वास्थ्य केंद्र से करीब 5 किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित मातावाली हेर डेरी आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे। यहां दूर-दूर बसे घरों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयासों को देखकर उन्होंने आशा सहयोगिनियों और स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना की। 10 गर्भवतियों की हुई प्रसव पूर्व जांच निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र पर 10 गर्भवती महिलाएं जांच के लिए मौजूद मिलीं। आशा सहयोगिनियों ने घर-घर जाकर उन्हें केंद्र तक पहुंचाया। यहां सभी महिलाओं की हीमोग्लोबिन सहित जरूरी प्रसव पूर्व (एएनसी) जांच की गई। जांच में केवल एक महिला का हीमोग्लोबिन 10.5 ग्राम मिला, जबकि बाकी सभी महिलाओं का हीमोग्लोबिन करीब 11 ग्राम रहा। सीएमएचओ ने इसे नियमित निगरानी और समय पर उपचार का सकारात्मक परिणाम बताया। महिला बोली- टीम घर आकर भी करती है जांच निरीक्षण के दौरान गर्भवती महिला भूरी ने बताया कि दुर्गम क्षेत्र में रहने के बावजूद उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं की कोई कमी महसूस नहीं होती। एएनएम और स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से फोन कर हालचाल पूछते हैं। यदि किसी कारण से वे केंद्र तक नहीं पहुंच पातीं, तो स्वास्थ्य विभाग की टीम घर आकर जांच करती है और मुफ्त दवाइयां भी उपलब्ध कराती है। 100% पंजीकरण और सुरक्षित मातृत्व पर फोकस सीएमएचओ डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि 15 से 18 जुलाई तक चल रहे इस विशेष अभियान में जिले की सभी गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीकरण, नियमित एएनसी जांच, हीमोग्लोबिन परीक्षण और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। स्कूलों और एमसीएचएन सत्र का भी किया निरीक्षण दौरे के दौरान डॉ. राठौड़ ने कुंडला खुर्द के दो स्कूलों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने संस्था प्रधानों से चिकित्सा विभाग के 'शक्ति दिवस' अभियान की प्रगति पर चर्चा की और बच्चों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा की। इसके बाद शहर के सुजारेश्वर आंगनबाड़ी केंद्र (आंबावाड़ी पीएचसी के अधीन) में चल रहे मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण (एमसीएचएन) सत्र का निरीक्षण किया। यहां टीकाकरण, पोषण गतिविधियों और रिकॉर्ड का जायजा लेकर कार्मिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।