कवाई निवासी एक महिला की एफडी को तोड़कर बैंक खाते से ऑनलाइन 18 लाख 93 हजार रुपए पार करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने मध्यप्रदेश के मैहर से एक मैकेनिकल इंजीनियर और एक ड्राइवर को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बिना ओटीपी महिला के खाते का ऑनलाइन एक्सेस लेकर इस बड़ी ठगी को अंजाम दिया था। गत एक जुलाई 2025 को सारथल थाना क्षेत्र के बडाई, हाल जयनगर कालोनी कवाई निवासी द्रोपदी बाई पत्नी रमेशचंद धाकड़ ने साइबर क्राइम थाना बारां में रिपोर्ट दी थी। जिसका पुलिस ने खुलासा किया है। एसपी अभिषेक अंदासु ने बताया कि द्रोपदी बाई के पति रमेशचंद धाकड़ की 6 बीघा जमीन 7-8 साल पहले अकावद बांध के डूब क्षेत्र में आ गई थी। इसका उन्हें 32 लाख रुपए मुआवजा मिला था। रमेशचंद ने इसमें से 10 लाख और 8 लाख रुपए की दो एफडी साल 2020 में एयू बैंक शाखा बारां में पत्नी के नाम करवाई थी। गत 19 जून 2025 को जब दंपती बैंक से रुपए निकालने पहुंचे, तो मैनेजर ने बताया कि खाते में एफडी के पैसे ही नहीं हैं। किसी अज्ञात व्यक्ति ने ऑनलाइन एफडी तोड़कर पूरी रकम निकाल ली। हैरान करने वाली बात यह थी कि पीड़िता के पास न तो कोई फोन आया और न ही कोई ओटीपी मिला। मास्टरमाइंड है इंजीनियर आरोपी इंजीनियर श्रीकांत ने यह खाता साइबर ठगों के गिरोह को सौंप दिया। गिरोह ने महिला के खाते का एक्सेस लेकर 18.93 लाख रुपए उड़ाए और राजन के खाते में 12.13 लाख रुपए डालकर एटीएम से निकाल लिए। आरोपी इंजीनियर ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह पहले भी कई लोगों के खाते खरीदकर साइबर ठगों को बेच चुका है। इंजीनियर खरीदता था बैंक खाते, ड्राइवर ने चंद रुपयों के लिए बेचा ईमान साइबर थानाधिकारी भंवर सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने जब बैंक खातों की पड़ताल की, तो ठगी की रकम मध्य प्रदेश के मैहर (डेल्हा) निवासी राजन साकेत (26) के खाते में ट्रांसफर हुई मिली। पुलिस ने दबिश देकर राजन को दबोचा तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। राजन ने बताया कि वह ड्राइवरी करता है। गांव के ही श्रीकांत लखेर (32) ने उसे रुपयों का लालच दिया था। श्रीकांत मैकेनिकल इंजीनियर है और ई-मित्र की दुकान चलाता है। श्रीकांत के कहने पर राजन ने इंडियन और यूनियन बैंक में खाते खुलवाए और अपनी दो मोबाइल सिम, एटीएम व पासबुक श्रीकांत को बेच दी।