बारां के जिला अस्पताल परिसर में सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए 300 केएलडी क्षमता का नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 3 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसका कार्य आरएसआरडीसी की ओर से किया जाएगा। इसके लिए निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अस्पताल परिसर में 240 बेड क्षमता वाले मेडिकल कॉलेज अस्पताल का नया भवन तैयार हो चुका है। इसके अलावा क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू), हॉस्टल और रेजिडेंट्स हॉस्टल सहित अन्य भवनों का निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है। निविदा प्रक्रिया भी शुरू हुई बढ़ते बुनियादी ढांचे और मरीजों की संख्या को देखते हुए आधुनिक एसटीपी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। यह नया प्लांट अस्पताल परिसर के सभी प्रमुख भवनों, जैसे अडानी ओपीडी विंग और मदर एंड चाइल्ड हेल्थ विंग से निकलने वाले गंदे पानी और मेडिकल अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करेगा। डेढ़ करोड़ की लागत से बना था पुराना एसटीपी प्लांट उल्लेखनीय है कि अस्पताल परिसर में पहले से ही लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से बना एक एसटीपी प्लांट वर्षों से बंद पड़ा है। संचालन के अभाव में इसकी मशीनरी जर्जर हो चुकी है और यह प्लांट अब केवल एक शोपीस बनकर रह गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि इस पुराने प्लांट को दोबारा चालू करना हो तो इसकी मरम्मत और सुधार पर लगभग 50 से 60 लाख रुपए का खर्च आ सकता है, लेकिन इसके प्रभावी संचालन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर ध्यान न दिए जाने के कारण यह प्लांट बंद हो गया। 5 साल के ठेके पर देंगे संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी नए एसटीपी के माध्यम से उपचारित पानी का उपयोग अस्पताल परिसर में बागवानी और सिंचाई के लिए किया जाएगा। इसके अलावा, प्लांट से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट से खाद भी तैयार की जाएगी, जिससे परिसर की हरियाली को बढ़ावा मिलेगा। इससे पानी की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस नए प्लांट के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी 5 साल तक ठेकेदार को ही सौंपी जाएगी। आरएसआरडीसी के प्रोजेक्ट निदेशक अनुज मीणा ने बताया कि पुराने प्लांट की स्थिति की विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन नया एसटीपी बनने से अस्पताल परिसर की ड्रेनेज और सीवरेज व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। ठेकेदार को 5 साल तक मेंटेनेंस और मरम्मत की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे प्लांट का संचालन नियमित और प्रभावी बना रहेगा।