बारां जिले में हुई अच्छी बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई ने जोर पकड़ लिया है। मानसून की सुस्त शुरुआत के कारण पिछले कई दिनों तक धीमी रही बुवाई अब तेज हो गई है, जिससे किसानों में उम्मीद जगी है। मौसम अनुकूल रहने पर आने वाले एक सप्ताह में बुवाई का काम तेजी पकड़ने की संभावना है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 9 जुलाई तक जिले में औसत 171.10 एमएम बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक 177.88 एमएम बारिश ही दर्ज हुई है। यह पिछले साल की इसी अवधि (497.44 एमएम) से काफी कम है। मानसून की देरी से पर्याप्त नमी न मिलने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने बुवाई टाल दी थी। वे बीज खराब होने के जोखिम से बचने के लिए पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे थे। अब लगातार बारिश शुरू होने से खेतों में फिर से हलचल बढ़ने लगी है। कृषि विभाग को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में बुवाई का प्रतिशत तेजी से बढ़ेगा। विभाग ने इस साल जिले में 3.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें सर्वाधिक 1.70 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन, 90 हजार हेक्टेयर में मक्का और 40 हजार हेक्टेयर में धान की बुवाई प्रस्तावित है। इसके मुकाबले अब तक लगभग 82 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन, 25 हजार हेक्टेयर में मक्का और 14 हजार हेक्टेयर में धान की बुवाई हो पाई है। आगामी सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना मौसम विभाग की ओर से आगामी एक सप्ताह में जिले में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे मे मानसून के जोर पकड़ने पर बुवाई में भी तेजी आएगी। वहीं, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का पहला और दूसरा सप्ताह खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि इस दौरान अच्छी बारिश का क्रम बना रहता है तो लक्ष्य के अनुरूप बुवाई पूरी होने की संभावना है, लेकिन यदि फिर से बारिश का लंबा अंतराल रहा तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक राजेश विजय ने बताया कि मानसून की देरी से शुरुआती दिनों में बुवाई प्रभावित हुई है, लेकिन अब बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। किसान पर्याप्त नमी होने पर तुरंत बुवाई करें। जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई है, वहां कम पानी वाली फसलों और अनुशंसित किस्मों को प्राथमिकता दें। मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से नुकसान की आशंका कम होगी।