झुंझुनूं में इस साल जनवरी से मई तक 33 लोग सांप के काटने के बाद इलाज के लिए बीडीके अस्पताल पहुंचे हैं। मानसूनी सीजन शुरू होने के साथ ही सर्पदंश का खतरा और बढ़ जाता है। बारिश के दौरान खेतों, ढाणियों और घरों के आसपास सांपों की आवाजाही बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में जोखिम ज्यादा रहता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और सर्पदंश होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है। बारिश में क्यों बढ़ता है खतरा विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के दौरान सांपों के बिलों में पानी भर जाता है। ऐसे में वे सुरक्षित स्थान और भोजन की तलाश में बाहर निकलते हैं। इसी समय खेतों में बुवाई का काम भी शुरू हो जाता है, जिससे किसानों का खेतों में आना-जाना बढ़ जाता है। वहीं घरों के आसपास पड़ा कबाड़, लकड़ी के ढेर और झाड़ियां भी सांपों के छिपने के लिए सुरक्षित जगह बन जाती हैं। हर साल बढ़ रहे सर्पदंश के मामले बीडीके अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2021 में 37, वर्ष 2022 में 52, वर्ष 2023 में 48, वर्ष 2024 में 80 और वर्ष 2025 में 100 सर्पदंश के मामले दर्ज हुए। वहीं वर्ष 2026 में जनवरी से मई तक ही 33 मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। सावधानी से टल सकता है खतरा डॉक्टरों ने सलाह दी है कि रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें। घरों के आसपास सफाई रखें, कबाड़ और लकड़ी के ढेर जमा न होने दें। खेतों में काम करते समय जूते या गद्देदार चप्पल पहनें और झाड़ियों में हाथ डालने से बचें। सतर्कता और समय पर इलाज ही सर्पदंश से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।