अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के कारण राजस्थान का मिनरल उद्योग प्रभावित हुआ है। गुजरात के मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्रीज में डिमांड घटने से करीब 2300 से ज्यादा मिनरल्स-ग्राइंडिंग यूनिट्स बंद हो गई हैं। इंडस्ट्रीज से जुड़े लोगों का दावा है कि हर दिन करीब 2 करोड़ 70 लाख से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। बिहार, झारखंड, बंगाल के हजारों मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं। दरअसल, मोरबी में ज्यादातर इंडस्ट्रीज पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) पर आधारित है। युद्ध के कारण गैस सप्लाई प्रभावित होने से वहां भी काम बंद है। ब्यावार में ही 90 फीसदी यूनिट्स ठप राजस्थान में करीब 6 हजार से ज्यादा मिनरल्स ग्राइंडिंग यूनिट्स हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या ब्यावर, भीलवाड़ा, अजमेर, सीकर, उदयपुर में हैं। इनमें ब्यावर में तो करीब 90 फीसदी फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। इनमें काम करने वाले 5 हजार से ज्यादा मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। फैक्ट्री मालिकों का दावा है कि व्यापारियों के लिए इनका फिक्स खर्चा (लोन की किश्त) भी चुकाना भारी पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से राहत देने की मांग की है। हर महीने का 15 करोड़ का टर्न ओवर राजस्थान में ब्यावर खनिज पिसाई का एक प्रमुख केंद्र है, जिसे विशेष रूप से फेल्सपार और क्वार्ट्ज की पिसाई के लिए जाना जाता है। यहां हर महीने करीब 15 करोड़ का टर्न ओवर होता है। यहां से ग्राइंड किए मिनरल का बड़ा हिस्सा मोरबी (गुजरात) जाता है, जहां सिरेमिक उद्योग में इसका उपयोग होता है। वहीं, उत्तरप्रदेश के खुरजा में कप-प्लेट बनाने और फिरोजाबाद में चूड़ी बनाने के उद्योग में इस मिनरल की खपत होती है। पहले सरकार की नीति ने मारा और अब युद्ध की मार लघु उद्योग संघ ब्यावर के उपाध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया-ब्यावर में मिनरल की करीब 800 फैक्ट्रियां थी और सरकार की गलत नीतियों के कारण 500 के करीब फैक्ट्रियां पहले ही बंद हो चुकी हैं। अब युद्ध के कारण फैक्टियां बंद हैं और ग्राइंड मिनरल की डिमांड नहीं है। मिनरल व्यवसायी प्रवीण जैन ने बताया-लोन की किश्तें हैं और ब्याज लग रहा है। परमानेंट मजदूरों को वेतन भी देना पड़ रहा है। इसके अलावा स्टॉक का ब्याज भी भुगतना पड़ रहा है। करीब 15 करोड़ का हर महीने नुकसान हो रहा है। बिजली बिल का मिनिमम चार्जेज ही 40 से 50 हजार रुपए आता है। जब फैक्ट्रियां बंद हैं तो सरकार को राहत देनी चाहिए। परिवार के लिए रोजी रोटी का संकट छावनी फाटक के बाहर रहने वाले जाकिर हुसैन ने बताया- फैक्ट्री में मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। सभी घर पर बैठे हैं और काम नहीं है। अब फैक्ट्रियां बंद हैं, लेकिन उन्हें फैक्ट्रियों की रखवाली के लिए गार्ड का काम मिल गया है। परिवार वालों को कोई काम नहीं मिल रहा। अगर ऐसा ज्यादा दिन चला तो मुश्किल हो जाएगी। हिम्मतसिंह ने बताया- फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं और परिवार के 7-8 व्यक्ति हैं, जो यहां पर मजदूरी कर रोटी रोजी की व्यवस्था करते थे, लेकिन अब सभी बेरोजगार हो गए हैं। सभी को गांव भेज दिया है और वह दिहाड़ी मजदूरी ढूंढकर जैसे-तैसे गुजारा कर रहा है, लेकिन ऐसे ज्यादा नहीं चल पाएगा। 3400 से ज्यादा खदानों पर भी असर मिनरल्स इंडस्ट्रीज से जुड़े उद्योगों का दावा है कि युद्ध के कारण करीब 100 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस प्रभावित हुआ है। फैक्ट्रियों में पत्थरों के ढेर लगे हैं, लेकिन मशीनें नहीं चल रही हैं। यूनिट्स बंद होने से राजस्थान की 3400 से ज्यादा खदानों पर भी असर हुआ है। इन्हीं खदानों से क्वार्ट्ज और फेल्सपार पत्थर निकलता है। इन्हीं पत्थरों को पीसकर पाउडर बनता है। ये खदानें भी बंद हो गई हैं।