भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव पर तीन दिन पहले महिला खिलाड़ियों ने दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। वहीं दूसरी ओर गुरुवार को बड़ी संख्या में युवा क्रिकेटर, महिला खिलाड़ी और उनके अभिभावक सचिव के समर्थन में RCA पहुंचे। उन्होंने महिला खिलाड़ियों की ओर से लगाए आरोपों को झूठा बताया। साथ ही जिला क्रिकेट संघ के खिलाफ हुई कार्रवाई वापस लेने की मांग की। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से भरतपुर क्रिकेट का विवाद गहरा गया है। महिला खिलाड़ियों ने RCA के प्रशासक भास्कर सावंत के नाम शिकायत सौंपी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव शत्रुघ्न तिवारी लंबे समय से महिला खिलाड़ियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। शिकायत में कहा गया था कि सिलेक्शन प्रक्रिया का दबाव बनाकर महिला खिलाड़ियों का कथित रूप से यौन शोषण किया जाता है। खिलाड़ियों का दावा है कि कई लड़कियां इसका शिकार हो चुकी हैं, लेकिन बदनामी और भविष्य खराब होने के डर से खुलकर सामने नहीं आईं। एक महिला खिलाड़ी ने मामला दर्ज कराया, जांच जारी शिकायत में कहा गया कि एक महिला खिलाड़ी ने शत्रुघ्न तिवारी के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया है, जिसकी जांच जारी है। खिलाड़ियों ने यह भी आरोप लगाया कि सचिव अपनी निजी क्रिकेट अकादमी में अभ्यास करने के लिए दबाव बनाते हैं। ऐसा नहीं करने पर सिलेक्शन में भेदभाव किए जाने का डर बना रहता है। समर्थन में आए दूसरे खिलाड़ी भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के समर्थन में आए दर्जनों युवा क्रिकेटर और उनके अभिभावक ने कहा- हमने सालों तक भरतपुर जिला क्रिकेट संघ से क्रिकेट खेला है, लेकिन कभी भी सचिव के व्यवहार को लेकर उन्हें किसी प्रकार की शिकायत नहीं रही। उन्होंन कहा- मैदान पर अभ्यास और मैचों के दौरान खिलाड़ियों के साथ सहयोगात्मक वातावरण रहा है और वर्तमान विवाद से जिले की क्रिकेट गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। अभिभावकों ने कहा- कुछ लोग जिला क्रिकेट संघ पर नियंत्रण स्थापित करने और RCA चुनाव में भरतपुर के प्रतिनिधित्व को प्रभावित करने के उद्देश्य से झूठी शिकायतें और एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं। इससे भरतपुर क्रिकेट की छवि खराब हो रही है और खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर लग गया है। निष्पक्ष जांच की मांग खिलाड़ियों और उनके परिजनों ने कहा- आगरा जिला क्रिकेट संघ के खिलाफ की गई कार्रवाई जारी रहती है तो इसका असर खिलाड़ियों के करियर और जिले की क्रिकेट गतिविधियों पर पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।