भीलवाड़ा के मांडल में नियमों के खिलाफ पट्टे जारी करने के आरोप में तत्कालीन सरपंच एवं प्रशासक, ग्राम विकास अधिकारी और संबंधित वार्ड पंचों के खिलाफ साजिश रचने और पद का गलत इस्तेमाल करने का मामला दर्ज किया गया है। जिला परिषद की जांच में सामने आया कि नियमों अनदेखी कर 183 पट्टे बिना नीलामी के रियायती या मुफ्त में बांट दिए गए। जांच में यह भी पता चला कि बिना मंजूर नक्शों और जरूरी सूचना के ही कागजों में पट्टे जारी कर दिए गए। मौके पर पत्थरगढ़ी भी नहीं मिली और पात्र लोगों से जुड़े जरूरी दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं पाए गए। विकास अधिकारी की रिपोर्ट पर कार्रवाई मांडल थाना प्रभारी रोहिताश्व यादव ने बताया - विकास अधिकारी गुलाबसिंह गुर्जर की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सरपंच एवं प्रशासक संजय भंडिया, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी कजोड़मल गुर्जर और संबंधित वार्ड पंचों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र व पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के बाद खुला पट्टों का खेल ग्रामवासियों की शिकायत पर जिला परिषद के सीईओ ने जांच कराई। जांच दल ने कॉलोनियों और अवैध पट्टों से जुड़े मामले की पड़ताल की, जिसमें नियमों के विपरीत पट्टे जारी किए जाने की बात सामने आई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में दोषी पाए जाने पर ग्राम विकास अधिकारी कजोड़मल गुर्जर को हटा दिया गया है। 183 पट्टे बिना नीलामी जारी करने का आरोप जांच में सामने आया कि तत्कालीन प्रशासक और ग्राम विकास अधिकारी ने राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 की अवहेलना करते हुए मेजा रोड और गंगापुर रोड पर 19, खसरा नंबर 8008 में 26, धोवनी नाड़ी की आराजी नंबर 8795 और 8796 में 116 तथा रूपी देवी कॉलेज रोड व मुकेश खटीक के मकान के पास 22 पट्टे जारी किए। इस प्रकार कुल 183 पट्टे बिना नीलामी के रियायती अथवा निःशुल्क दे दिए गए।