मध्यप्रदेश के धार में शुक्रवार को जुमे की नमाज भोजशाला परिसर की बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की जमीन पर अदा की गई। इससे पहले प्रशासन ने जेसीबी से जमीन समतल कराई। बारिश से गीली जमीन पर तिरपाल बिछाई। पूरे इलाके की बैरिकेडिंग की गई। सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात रहा। इसके पहले सुबह यहां नमाज के खिलाफ स्थानीय रहवासियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि जिस जगह नमाज की अनुमति दी गई है, वह निजी जमीन है। हम लंबे समय से इस पर खेती करते आ रहे हैं। हम यहां नमाज नहीं होने देंगे। अगर जरूरत पड़ी तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। ग्रामीण बोले- हमारे पिता-दादा की जमीन है स्थानीय निवासी चंद्रकांत देवड़ा ने कहा- ये हमारे परिवार के तीन लोगों की निजी जमीन है। इससे हमारा घर चलता है। हम यहां नमाज नहीं होने देंगे। राधाबाई ने कहा- ये हमारे पिता और भाइयों की जमीन है। चार पीढ़ी से हमारे पास है। वहीं पुष्पा बिजवा ने कहा- ये हमारे पिता-दादा की जमीन है। हम उनको क्यों नमाज पढ़ने दें? प्रशासन ने हमें पहले कोई जानकारी भी नहीं दी। इस जमीन पर हमारी पीढ़ी गुजर गई। हम जमीन नहीं छोड़ेंगे। नमाज के लिए नहीं देंगे। अगर दे देंगे तो हम कहां जाएंगे। एसडीएम पहुंचे, समझाइश के बाद शांत हुए आपत्तिकर्ता विरोध की सूचना मिलते ही एसडीएम राजकुमार हलदर प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों से चर्चा कर भरोसा दिलाया कि उनकी आपत्तियों को सुना जाएगा। इसके बाद विरोध कर रहे लोग शांत हुए। एसडीएम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बारिश के कारण 611 की जगह 612 पर नमाज कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने कहा- बारिश की वजह से खसरा नंबर 611 की जमीन पर काफी कीचड़ था। इसलिए आपसी सहमति से कमाल मौला मस्जिद से सटी खसरा नंबर 612 की जमीन पर जुमे की नमाज अदा करने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया- खसरा नंबर 611 और 612 की जमीन से कमाल मौला मस्जिद सीधे दिखाई देती है, इसीलिए हम यहां नमाज पढ़ने के लिए राजी हुए। अगले शुक्रवार तक अगर कोर्ट का कोई नया अंतरिम या अंतिम निर्णय आता है, तो हम और प्रशासन दोनों उसका पालन करेंगे। पहले कब्रिस्तान की जमीन पर डमी नमाज कराई गई थी अब्दुल समद ने कहा कि बसंत पंचमी के दिन भी भोजशाला परिसर के इसी क्षेत्र में नमाज अदा की गई थी। उस समय कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं हुई थी। 23 जनवरी को प्रशासन ने जिस स्थान पर डमी नमाज कराई थी, वह कब्रिस्तान की जमीन थी। कब्रिस्तान में जुमे की नमाज अदा नहीं की जाती। यही पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने भी रखा गया था। देखिए, तस्वीरें… 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने तय की थी नमाज की जगह 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला से सटी हुई जमीन नमाज के लिए मुस्लिम समाज को दी थी। यहां हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा की जा सकेगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस भूखंड तक पहुंचने के लिए अलग रास्ता है। चीफ जस्टिस ने कहा था- यह विवादित भोजशाला परिसर के बिल्कुल पास है। इसलिए यह नमाज के लिए उपयुक्त स्थान है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को यहां जरूरी व्यवस्थाएं करने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नमाज के लिए यहां दी जगह जस्टिस जॉयमाल्य बागची बोले- धार्मिक अधिकार नहीं रोके जा सकते सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा था, धार्मिक अधिकार मौजूद हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। सिर्फ कानून-व्यवस्था की आशंका के आधार पर लोगों के धार्मिक अधिकार नहीं रोके जा सकते। कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर भविष्य में दोनों पक्ष आपसी सहमति से कोई दूसरा उपयुक्त स्थान तय कर लेते हैं, तो उस पर भी कोई रोक नहीं होगी। यह आदेश मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर आया, जिसमें हाईकोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला के पास वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने कोई नया आदेश नहीं दिया है। अदालत ने सिर्फ अपने पहले के अंतरिम आदेश को स्पष्ट किया है। पहले कोर्ट ने भोजशाला के पास वैकल्पिक जगह देने को कहा था, अब उस जगह को तय कर दिया गया है। पहले चालीसपीर दरगाह का विकल्प दिया गया था 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने मालीवाड़ा गांव स्थित चालीसपीर दरगाह के पास जगह तय की थी, लेकिन मुस्लिम समाज ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह स्थान भोजशाला से करीब 2 किलोमीटर दूर है। अदालत के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है। इसके बाद अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को भोजशाला परिसर के बाहर या उससे सटे क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। पहले यहां दी गई थी जमीन धार में जुमे की नमाज के मिनट टु मिनट अपडेट्स के लिए नीचे दिए लाइव ब्लॉग से जरूर गुजर जाइए…