बीकानेर पुलिस ने साइबर ठगी की रकम अपने बैंक खातों में प्राप्त करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से 68 लाख रुपए की साइबर ठगी से संबंधित एनसीआरपी (राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल) पर शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार- जेएनवीसी थाना और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए रामस्वरूप पुत्र मोहनराम जाट (20) निवासी लालमदेसर बड़ा, मुन्नीराम पुत्र हेमाराम जाट (21) निवासी तेजरासर और सीताराम पुत्र बाबूलाल जाट (20) निवासी लालमदेसर बड़ा को गिरफ्तार किया है। टेलीग्राम ग्रुप से संचालित होता था नेटवर्क जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर ठगी करने वाले गिरोह के साथ मिलकर टेलीग्राम ग्रुप के जरिए काम करते थे। कमीशन के बदले अपने और अन्य लोगों के नाम से संचालित 'म्यूल अकाउंट' उपलब्ध कराते थे। देशभर में साइबर ठगी से हासिल रकम इन खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी। इसके बाद आरोपी, गिरोह की ओर से भेजी गई बैंक डिटेल के अनुसार रकम आगे ट्रांसफर कर देते थे और बदले में 10 प्रतिशत कमीशन अपने पास रख लेते थे। 68 लाख की ठगी के मिले सबूत आरोपियों के बैंक खातों की जांच में पता चला कि इन खातों में अब तक करीब 68 लाख रुपए की साइबर ठगी की राशि जमा करवाई जा चुकी है। आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से एनसीआरपी पोर्टल पर कई शिकायतें दर्ज हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले 6 महीने से बीकानेर में रहकर इस साइबर ठगी नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। आरोपियों के कब्जे से 15 मोबाइल फोन, 9 सिम कार्ड, 3 बैंक पासबुक, 3 चेकबुक, 8 एटीएम कार्ड, 4 आधार कार्ड, 3 पैन कार्ड और ठगी में प्रयुक्त एक स्कॉर्पियो वाहन जब्त किया है। जब्त सामग्री का तकनीकी विश्लेषण कर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। मास्टरमाइंड की तलाश जारी पुलिस का कहना है कि इस पूरे गिरोह का संचालन करने वाले मुख्य साइबर ठग और टेलीग्राम ग्रुप के मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है। साथ ही आरोपियों के बैंक खातों में जमा साइबर ठगी की राशि को फ्रीज करवाने की कार्रवाई भी की जा रही है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कमीशन या लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम या मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। ऐसा करना गंभीर अपराध है और संबंधित व्यक्ति भी साइबर अपराध में सह-आरोपी बन सकता है।