बूंदी जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन के तहत स्थापित 107 आरओ प्लांट पिछले ढाई महीने से बंद पड़े हैं। इन प्लांटों का उद्देश्य ग्रामीणों को फिल्टर युक्त शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन इनके बंद होने से ग्रामीण फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। प्रशासन की उदासीनता के कारण ग्रामीणों की बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। ये 107 आरओ प्लांट राज्य सरकार द्वारा 2017-2018 में 4 फर्मों के माध्यम से बूंदी, तालेड़ा, केशवरायपाटन और नैनवा उपखंड क्षेत्रों में लगाए गए थे। इन प्लांटों से ग्रामीणों को 20 पैसे प्रति लीटर की दर से शुद्ध पानी मिल रहा था। 31 जनवरी 2026 को सभी प्लांट बंद कर दिए गए थे। हालांकि, कुछ समय बाद कुछ प्लांट फिर से चालू हुए, लेकिन अप्रैल में सभी प्लांट दोबारा बंद हो गए, जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान केशवरायपाटन उपखंड की लेसरदा पंचायत के ईश्वर नगर गांव में सरकारी आरओ प्लांट पिछले 5 साल से बंद है। इस गांव में खारा और फ्लोराइड युक्त पानी होने के कारण पूरा गांव इस प्लांट पर निर्भर था। ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसी तरह, सेदड़ी निवासी परमानंद मीणा ने बताया कि देहित पंचायत के सेदड़ी चांदनहेली स्कूल परिसर में लगा सरकारी आरओ प्लांट भी दो साल से बंद है। इसके चलते स्कूली बच्चे फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बंद पड़े सभी आरओ प्लांट को तत्काल चालू करवाने की मांग की है। आरओ प्लांट के पूर्व साइड इंचार्ज हर्ष अग्रवाल ने बताया कि प्लांटों का अनुबंध 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो गया था। आगे का टेंडर जारी नहीं होने के कारण सभी स्टाफ को हटा दिया गया और आरओ प्लांट बंद कर दिए गए। उन्होंने आश्वासन दिया कि नया टेंडर जारी होने पर प्लांटों को फिर से चालू कर दिया जाएगा।