राजस्थान के रेगिस्तान में अमेरिका की सबसे एडवांस्ड हेलफायर मिसाइलों के धमाके हुए। दावा है कि इन्हीं मिसाइलों का पिछले साल ईरान पर हमले में इस्तेमाल किया गया था। हेलफायर के अलावा राजस्थान के आसमान से अपाचे हेलिकॉप्टर ने भी अचूक निशान लगाए। कमांड सेंटर से दुश्मनों के ड्रोन्स को भी ब्लास्ट किया गया। ये नजारा था इंडियन आर्मी की ‘ब्रह्मास्त्र’ एक्सरसाइज का। जैसलमेर की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में गुरुवार को हुए इस युद्धाभ्यास ने मॉडर्न वॉर प्लांड को टेस्ट किया। सेना के अधिकारियों का कहना है कि आर्मी में नए हेलिकॉप्टर्स की एंट्री ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। सबसे पहले देखिए - वॉर एक्सरसाइज के PHOTOS… अपाचे से फायर की गईं हेलफायर मिसाइलें एक्सरसाइज में अमेरिका में बनीं AGM-114 हेलफायर मिसाइलों का भी इस्तेमाल हुआ। इनसे 8 किलोमीटर दूर एक टैंक सहित दूसरे निशाने उड़ाए गए। इसके बाद हेलिकॉप्टर ने नीचे आकर 70 एमएम हाइड्रा रॉकेटों से हमला किया, जिससे दुश्मन के कैंप नष्ट हुए। अंत में हेलिकॉप्टर के नीचे लगी M230 चेन गन से 1200 राउंड प्रति मिनट की रफ्तार से फायरिंग कर छोटे लक्ष्यों को भी निशाना बनाया गया। क्या होती है हेलफायर मिसाइल? हेलफायर मिसाइलें (AGM-114 Hellfire) अमेरिका द्वारा विकसित लेजर-गाइडिड सटीक हमले वाली हवा-से-जमीन पर हमला करने वाले मिसाइलें हैं। इनका वजन लगभग 45-50 किलोग्राम और रेंज 8-11 किलोमीटर होती है। हेलफायर का उपयोग ड्रोन, हेलिकॉप्टर और फाइटर जेट्स से किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि साल 2025 में ईरान पर हमले में इजराइल ने इन्हीं मिसाइलों को दागा था। एक कमांड से उड़ाए दुश्मन के ड्रोन सेना ने इस अभ्यास में हाईटेक रडार सिस्टम से दूर से ही ड्रोन की लोकेशन ट्रैक की गई। इसके बाद कंट्रोल रूम से ही मिसाइल और गन को कमांड देकर टारगेट लॉक करवाया गया। कुछ सेकेंड के इस प्रोसेस से सटीक निशाना लगाने में मदद मिली। सेना का यह सिस्टम 4 किलोमीटर दूर से आसानी से कमांड दे सकता है। एंटी-एयरक्राफ्ट गन से ड्रोन को नष्ट किया ब्रिगेडियर पी.के. सिंह ने बताया कि एक्सरसाइज में आधुनिक रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से ड्रोन टारगेट को नष्ट किया गया। इसमें ड्रोन के नजर आते ही एयर डिफेंस यूनिट्स ने उन्हें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जाम किया। फिर एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से सटीक निशाना लगाकर उन्हें आसमान में नष्ट कर दिया। एक्सरसाइज में कोई भी मिसफायर नहीं हुआ। रियल टाइम डेटा शेयरिंग- सेना सेना के अधिकारियों के अनुसार इस एक्सरसाइज में जमीन और हवा के बीच रियल टाइम डेटा साझा किया गया, जिससे ऑपरेशन की सटीकता और गति दोनों में सुधार हुआ। अभ्यास से पहले कई हफ्तों तक तैयारी की गई। इसमें सेना की दक्षिणी कमान की एयर डिफेंस ब्रिगेड ने हाई-इंटेंसिटी फायरिंग अभ्यास किया, जिसमें पायलटों ने सिमुलेशन के जरिए ट्रेनिंग ली और तकनीकी टीम ने रेगिस्तानी परिस्थितियों में हथियारों की जांच की। सेना के पास कई हेलिकॉप्टर, अपाचे सबसे घातक सेना के पास अब अपाचे, प्रचंड और रुद्र जैसे हेलिकॉप्टर है। अपाचे टैंकों को निशाना बनाने में सक्षम है। प्रचंड ऊंचाई वाले इलाकों में काम करता है और रुद्र छोटे ऑपरेशन के लिए उपयोगी है। …. राजस्थान में युद्धाभ्यास से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर होगी बमबारी:बॉर्डर इलाकों में पहली बार आसमान में बाज की तरह हमला करने वाला एयरक्राफ्ट दिखेगा जैसलमेर सेक्टर के फॉरवर्ड इलाकों में भी दो महीने पहले सेना ने युद्धाभ्यास किया था। भारतीय सेना की कोनार्क कोर (12 कोर) की बैटल एक्स डिवीजन ने एकीकृत युद्धाभ्यास से अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया था। पूरी खबर पढ़िए…