दो थैलीसीमिया मरीजों के एचआईवी संक्रमित होने के मामले में ड्रग विभाग की टीम सोमवार सुबह फिर जेकेलोन ब्लड बैंक पहुंची और जरूरी दस्तावेज मांगे। इससे पहले रविवार को भी राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी और स्थानीय ड्रग विभाग की टीम ने ब्लड बैंक पहुंचकर जांच की थी। भास्कर को सूत्रों ने बताया कि इस मामले में दोनों एजेंसियों ने ब्लड बैंक प्रबंधन से उन सभी डोनर्स की सूचना मांगी है, जिनका ब्लड दोनों बच्चों को चढ़ा था। एक एचआईवी संक्रमित मरीज की डिटेल्स मिल भी चुकी है। अब सभी डोनर्स के नए सिरे से एचआईवी टेस्ट कराए जा सकते हैं। डोनर्स की वन टू वन ट्रैकिंग कराएंगे भास्कर के खुलासे के बाद स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के निदेशक डॉ. सुशील परमार, ज्वॉइंट डायरेक्टर प्रदीप, स्टेट नोडल ऑफिसर (ब्लड सेल) डॉ. महावीर सैनी ने ब्लड बैंक का दौरा किया। डॉ. परमार ने भास्कर को बताया कि ब्लड बैंक में नेट टेस्टिंग और फोर्थ जनरेशन टेस्ट का उपयोग किया जा रहा है। जो भी सैंपल रिएक्टिव पाए जाते हैं, उन्हें डिस्कार्ड कर देते हैं। अब हमने उन 30-35 लोगों का रिकॉर्ड निकलवाने को कहा है, जो इन मामलों में डोनर थे। उनकी वन-टू-वन ट्रैकिंग की जाएगी और आवश्यकतानुसार उनके टेस्ट दोबारा कराए जाएंगे। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भास्कर की खबर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा-अस्पतालों के हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि प्रसूताओं से लेकर बच्चों तक कोई सुरक्षित नहीं है। अभी कुछ ही दिन पहले कोटा में लापरवाही ने प्रसूताओं की जिंदगी छीन ली और अब 2 मासूम बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाने की खबर सामने आई है। क्यों लगातार घटनाओं के बाद भी सरकार की नींद नहीं टूट रही? सरकार जल्द से जल्द स्वास्थ्य के हालात सुधारे… अन्यथा प्रदेश की जनता सब देख रही है। जांच टीम ने ब्लड बैंक से ये जानकारियां मांगीं