एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज को अलग विश्वविद्यालय बने करीब पांच साल हो चुके हैं, पर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) की प्रशासनिक ढिलाई और वित्तीय तंगी का खामियाजा अब भी छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। एमबीएम विश्वविद्यालय के करीब 1500 छात्रों की लगभग 1.15 करोड़ रुपए की कॉशन मनी अब तक जेएनवीयू में अटकी हुई है। प्रति छात्र करीब 7500 रुपए की राशि वापस लेने के लिए विद्यार्थियों को बार-बार जेएनवीयू के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वर्ष 1951 में स्थापित एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज लंबे समय तक जेएनवीयू का संकाय रहा। वर्ष 2021 में राजस्थान सरकार ने इसे अलग विश्वविद्यालय का दर्जा देकर एमबीएम विश्वविद्यालय बनाया। उस समय छात्रों से जुड़े रिकॉर्ड, फीस और अन्य वित्तीय मामलों का हस्तांतरण होना था, लेकिन कॉशन मनी का मामला आज भी अधर में है। फंड की कमी बता टाल रहा जेएनवीयू छात्रों का आरोप है कि कॉशन मनी को लेकर जेएनवीयू प्रशासन से संपर्क करने पर फंड की कमी और प्रक्रिया पूरी होने का हवाला देकर मामला टाल दिया जाता है। विद्यार्थियों का कहना है कि यह उनकी जमा पूंजी है और विश्वविद्यालय के अलग होने के समय राशि को संबंधित संस्थान में समय पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए था। डिग्री-मार्कशीट के लिए भटक रहे छात्र कॉशन मनी के अलावा कुछ छात्रों को अब भी मार्कशीट और डिग्री प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें बार-बार विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।