राजस्थान समेत देशभर में बेटियों को सर्विक्स कैंसर से बचाव के लिए लगाया जा रहा ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन जागरूकता की कमी के चलते रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। देशभर में 28 अप्रैल तक 18,02,826 बेटियों को वैक्सीन लग चुकी है, जबकि प्रदेश में यह आंकड़ा 36,660 ही है। टीकाकरण के मामले में देश में मध्यप्रदेश पहले, बिहार दूसरे और कर्नाटक तीसरे स्थान पर हैं, जबकि राजस्थान रैंकिंग में 11वें नंबर पर खिसक गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटियों के सुरक्षा कवच के रूप में एचपीवी वैक्सीन की शुरुआत 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से की थी। इसके बाद भी प्रदेश टॉप-10 से बाहर बना हुआ है। केन्द्रीय चिकित्सा मंत्री जे.पी. नड्डा, राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर और चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़ ने संबंधित अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक बेटियों को सर्विक्स कैंसर से सुरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। टीकाकरण का लक्ष्य एक्सपर्ट व्यू: जागरूकता की कमी बड़ी वजह डॉ. अशोक गुप्ता, डॉ. सुनील गोठवाल और डॉ. तरुण पाटनी के अनुसार अभियान की धीमी रफ्तार के पीछे बोर्ड परीक्षाएं और अब एडमिशन प्रक्रिया बड़ी वजह है। इसके अलावा अभिभावकों में सर्वाइकल कैंसर और वैक्सीन को लेकर जागरूकता की कमी भी सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में हर साल करीब 74 हजार महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की शिकार होती हैं। गर्डासिल-4 वैक्सीन (0.5 एमएल) एचपीवी के चार प्रकार (6, 11, 16, 18) से बचाव देती है, जो अभी सरकारी अभियान में निशुल्क लगाई जा रही है। बाजार में इसकी कीमत 4-5 हजार रुपए तक है। क्या करें - यू-विन एप पर रजिस्ट्रेशन कर नजदीकी सेशन साइट चुनें। स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी के जरिए भी टीकाकरण की सुविधा। आगे- स्टेट टास्क फोर्स की मीटिंग में राजस्थान में एचपीवी का कवरेज बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण विकास के सहयोग से टीकाकरण के लिए अभियान चलाएंगे।