डीडवाना के छोटी खाटू कस्बे में सरकारी अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं के विरोध में युवाओं ने अनूठा प्रदर्शन किया। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर बड़ी संख्या में युवाओं ने रक्तदान शिविर आयोजित कर सरकार और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाई। युवाओं ने इस दौरान "सरकार और प्रशासन हमारा खून ले लें, लेकिन अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार जरूर करें" का संदेश दिया। इस प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से उन्होंने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर स्थिति को उजागर किया। दरअसल, छोटी खाटू का राजकीय अस्पताल लंबे समय से चिकित्सकों और अन्य संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस कस्बे के साथ-साथ आसपास के 50 से अधिक गांव भी इसी अस्पताल पर निर्भर हैं, लेकिन यहां पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अस्पताल में 12 डाॅक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 2 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें एक शिशु रोग विशेषज्ञ और एक मेडिकल ऑफिसर शामिल हैं। इसी तरह, नर्सिंग और सपोर्टिंग स्टाफ के 33 पदों में से 8 पद रिक्त पड़े हैं। अस्पताल की खराब स्थिति के कारण आपातकालीन परिस्थितियों, जैसे गर्भवती महिलाओं या सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मरीजों को तुरंत रेफर करना पड़ता है। गंभीर बात यह है कि रेफर करने के लिए यहां सरकारी एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं है। इसके अतिरिक्त, अस्पताल में मॉर्च्यूरी (शवगृह) की सुविधा नहीं है। आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में शव को 40 किलोमीटर दूर डीडवाना के राजकीय बांगड़ जिला अस्पताल या नागौर जिले के बड़ी खाटू अस्पताल भेजना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और सरकार को अवगत करा चुके हैं। पूर्व में भी विरोध प्रदर्शन किए गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। युवाओं ने स्पष्ट किया कि उनका यह विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि यह रक्तदान केवल एक सेवा नहीं, बल्कि सरकार को यह समझाने का एक संदेश है कि क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार अब बेहद आवश्यक हो चुका है।