मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 से कम बारिश और गिरते भूजल स्तर से जूझ रहे पांच हजार गांवों की तस्वीर बदली है। अभियान में वर्षा जल के संचयन के लिए एनिकट, चेक डैम, तालाब एवं जोहड़ बनाए गए। इसके साथ ही पुराने जल स्रोतों की मरम्मत कर पुनर्जीवित किया गया। इससे पांच हजार गांवों में भूजल में सुधार हुआ है। इससे कुओं व ट्यूबवेलों के जल स्तर में इजाफा हुआ है। गांवों में पेयजल व खेतों की सिंचाई के लिए जल उपलब्धता बढ़ी है। 5 लाख वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स बनाए अभियान के लिए 11 हजार 200 करोड़ रुपए का बजट रखा गया। जिससे 20 हजार गांवों में 5 लाख वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया। अभियान के पहले चरण में 349 पंचायत समितियों के 5135 गांवों में काम हुआ। तय लक्ष्य से ज्यादा 1.16 लाख से अधिक जल संरचनाएं तैयार की गईं। नतीजा ये कि कई इलाकों में भूजल स्तर सुधरा और पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी। बजट 2026-27 में इस अभियान के तृतीय चरण के तहत 2 हजार 500 करोड़ रुपए की लागत से 5 हजार गांवों में 1 लाख 10 हजार कार्य करवाने की घोषणा की गई है। सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में किए जा रहे नवाचारों से आने वाले समय में राजस्थान जल संकट से उबरकर एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरकर सामने आएगा। जमीनी स्तर पर ऐसे हुआ बदलाव जनभागीदारी बना सबसे बड़ा हथियार दूसरे चरण में भी रफ्तार तेज सरकार ने दूसरे चरण में 1 लाख से ज्यादा कामों का लक्ष्य रखा है। अब तक 1.04 लाख कार्यों को मंजूरी मिल चुकी है और 45 हजार से ज्यादा कामों की स्वीकृति जारी हो चुकी है। करीब 8 हजार काम पूरे भी हो चुके हैं, जबकि बाकी तेजी से जारी हैं। तीसरे चरण के तहत 2500 करोड़ रुपए खर्च कर 5 हजार गांवों में 1.10 लाख कार्य कराने की घोषणा की गई है।