चित्तौड़गढ़ में पुलिस लाइन के पास बन रहे होमगार्ड ट्रेनिंग सेंटर की बाउंड्री वाल का निर्माण नोटिस के बावजूद जारी रहने पर नगर परिषद की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची। अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य को रुकवाया दिया। विवाद बढ़ने पर कलेक्टर ने जांच कमेटी गठित कर दी है। अब रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई और अंतिम निर्णय लिया जाएगा। नोटिस के बावजूद जारी रहा निर्माण, मौके पर पहुंची टीम नगर परिषद द्वारा तीन दिन में बाउंड्री वाल हटाने का नोटिस देने के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य जारी रहा। स्थिति को देखते हुए नगर परिषद की टीम मौके पर पहुंची, जहां शहर कोतवाली और सदर थाना पुलिस जाब्ते के साथ मौजूद रही। तहसीलदार ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। नगर परिषद का आरोप: सड़क सीमा में अतिक्रमण नगर परिषद का कहना है कि होमगार्ड प्रशिक्षण केंद्र द्वारा बनाई जा रही बाउंड्री वाल निर्धारित सीमा से बाहर है और करीब 0.0050 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। यह हिस्सा मास्टर प्लान में प्रस्तावित 60 फीट चौड़ी सड़क के दायरे में आता है, जहां निर्माण नियमों के खिलाफ है। परिषद के अनुसार बाउंड्री वाल के कारण नाला निर्माण कार्य में भी बाधा आ रही है। परिषद ने तीन दिन में अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे, अन्यथा कार्रवाई कर खर्च संबंधित विभाग से वसूलने की चेतावनी दी थी। होमगार्ड विभाग का पक्ष: जमीन वैध, नियमों के तहत निर्माण प्रशिक्षण केंद्र के कमांडेंट रवि सिंह ने परिषद के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि संबंधित जमीन वर्ष 2013 में विधिवत विभाग को आवंटित की गई थी। उस समय सीमांकन कर पत्थरगढ़ी की गई थी और वर्ष 2021 में DGPS सर्वे के जरिए सीमाएं पुनः चिन्हित की गई थीं। उसी आधार पर पहले तारबंदी की गई थी और अब पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत करीब 80 लाख रुपए में से 20 लाख रुपए खर्च कर बाउंड्री वाल बनाई जा रही है। अतिक्रमण रोकने के लिए कराया जा रहा निर्माण कमांडेंट के अनुसार लंबे समय तक बाउंड्री वाल नहीं बनने के कारण जमीन पर भू-माफियाओं ने अतिक्रमण कर लिया था। इसे रोकने के लिए अब निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वहां कोई नाला निर्माण कार्य नहीं चल रहा है, क्योंकि यह कार्य दो महीने पहले ही पूरा हो चुका है और पानी की निकासी सुचारू है। प्रक्रिया पर उठाए सवाल, सड़क सीमा में निर्माण से इंकार विभाग ने आरोप लगाया कि पटवारी के निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को मौके पर नहीं बुलाया गया और पहले कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। विभाग का कहना है कि सड़क सीमा में कोई निर्माण नहीं किया गया है और पहले से बने कैमरा टावर से स्पष्ट है कि निर्माण निर्धारित सीमा के भीतर है। वैध भूमि पर निर्माण को अतिक्रमण बताकर तोड़ना गैरकानूनी होगा। कलेक्टर ने बनाई जांच कमेटी, रिपोर्ट के बाद होगा फैसला मामले को बढ़ता देख जिला कलेक्टर डॉ. मंजू चौधरी ने जांच कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट देगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।