चूरू जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत अब तक 6208 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई है। जांच के दौरान 225 उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवतियों की पहचान कर उनका पंजीकरण किया गया है। इन महिलाओं की नियमित निगरानी, समय पर उपचार और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 15 जुलाई से विशेष अभियान शुरू किया है। 15 जुलाई से चल रहा विशेष अभियान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की जांच और उपचार के लिए 15 जुलाई से विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य ऐसी गर्भवतियों की समय रहते पहचान कर उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। आशा-एएनएम करेंगी नियमित फॉलो-अप डॉ. शर्मा ने बताया कि आशा सहयोगिनी और एएनएम सप्ताह में दो बार हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं से संपर्क करेंगी। वहीं जुलाई और अगस्त में प्रसव संभावित महिलाओं की निगरानी चिकित्सा अधिकारी स्तर पर भी नियमित रूप से की जाएगी, ताकि किसी भी जटिलता की स्थिति में तुरंत उपचार मिल सके। घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य टीम अभियान के तहत जिले में 620 निरीक्षण किए गए हैं तथा 560 गर्भवती महिलाओं के घरों का दौरा किया गया है। सीएमएचओ ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि हाई रिस्क गर्भवतियों को स्वास्थ्य संस्थानों तक लाकर उनकी आवश्यक चिकित्सकीय जांच और उपचार सुनिश्चित किया जाए। मातृ मृत्यु दर रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (आरसीएचओ) डॉ. शशांक चौधरी ने कहा कि जिले में मातृ मृत्यु दर को रोकना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सेक्टर स्तर पर सभी संबंधित कर्मियों को जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। इन बिंदुओं पर रहेगा विशेष फोकस फील्ड में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी गर्भवती महिला प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) से वंचित न रहे। प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर सेवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) की शीघ्र पहचान की जाए। एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पूर्व सी-सेक्शन, जुड़वां गर्भ, कम या अधिक उम्र की गर्भवती महिलाएं और अन्य गंभीर लक्षणों वाली गर्भवतियों को एचआरपी श्रेणी में चिन्हित किया जाएगा। चार एएनसी जांच अनिवार्य डॉ. चौधरी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती की कम से कम चार एएनसी जांच सुनिश्चित की जाए। साथ ही हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, वजन, लंबाई, यूरिन एल्ब्यूमिन, एचआईवी और ब्लड शुगर जैसी जरूरी जांच समय पर कराई जाए, ताकि मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सके।