डीग जिला अस्पताल परिसर के बाहर अव्यवस्थित पार्किंग और बढ़ती भीड़ के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक, ओपीडी के समय यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों के सैकड़ों वाहन सड़क के दोनों ओर खड़े रहते हैं, जिससे आवागमन बाधित होता है। जाम के कारण गंभीर मरीजों को लाने वाली एम्बुलेंस को भी अस्पताल तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रास्ता नहीं मिलने से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता, जिससे उनकी जान को खतरा उत्पन्न हो जाता है। जाम के कारण मरीजों को सबसे बड़ी परेशानी अस्पताल में प्रतिदिन दुर्घटना, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। इन मरीजों के लिए प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है, लेकिन जाम के कारण उनका बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है। कई बार तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीजों की स्थिति बिगड़ जाती है। इस समस्या का मुख्य कारण अस्पताल के आसपास उचित पार्किंग व्यवस्था का अभाव है। अस्पताल के सामने एक पार्किंग क्षेत्र उपलब्ध है, लेकिन वहां निजी वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग रहती है। इनमें कई ऐसे वाहन भी शामिल हैं जिनका व्यावसायिक उपयोग बिना टैक्सी नंबर के किया जा रहा है। इसके चलते आम लोगों को अपने वाहन पार्क करने की जगह नहीं मिलती और वे सड़क किनारे वाहन खड़े करने को मजबूर होते हैं, जिससे जाम की समस्या और बढ़ जाती है। 'सड़क चौड़ी करने से कम हो सकती है परेशानी' स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन अस्पताल के सामने बने पार्किंग क्षेत्र को व्यवस्थित कर दे और सभी वाहनों को वहीं खड़ा करने के निर्देश दे, तो सड़क पर लगने वाले जाम से काफी हद तक राहत मिल सकती है। साथ ही अवैध रूप से चल रहे वाहनों पर भी कार्रवाई की जरूरत है। इसके अलावा अस्पताल के सामने की सड़क की चौड़ाई भी एक बड़ी समस्या है। वर्तमान में यह सड़क लगभग 30 से 35 फुट चौड़ी है, जो बढ़ते यातायात के दबाव के हिसाब से बेहद कम साबित हो रही है। जबकि मास्टर प्लान 2031 के तहत इस सड़क की चौड़ाई 120 फुट प्रस्तावित है। यदि प्रशासन इस योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई करता है, तो भविष्य में जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल क्षेत्र को ‘नो पार्किंग जोन’ घोषित किया जाए और पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही यातायात पुलिस की नियमित तैनाती भी की जाए, ताकि जाम की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में हालात और भी बदतर हो सकते हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता और गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ेगा ।