धौलपुर में भगवान परशुराम शोभायात्रा को लेकर ब्राह्मण समाज में विवाद गहरा गया है। भगवान परशुराम चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष पीसी बोहरा के कथित बयान के बाद समाज के लोगों और भगवान परशुराम शोभायात्रा समिति में भारी नाराजगी है। इस मामले पर गोविंद वाटिका स्थित समिति कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने ट्रस्ट प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले समाजहित और संगठनात्मक मजबूती के नाम पर शोभायात्रा समिति का ट्रस्ट में विलय कराया गया था, लेकिन अब ट्रस्ट अपने वादों से पीछे हटता नजर आ रहा है। ट्रस्ट अध्यक्ष के वीडियो आए सामने समिति सदस्यों ने बताया कि सोशल मीडिया पर ट्रस्ट अध्यक्ष पीसी बोहरा के कुछ वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में वे कथित रूप से कहते सुनाई दे रहे हैं, “मैं नहीं निकालूंगा परशुराम शोभायात्रा, जो करना है वो कर लो।” इस कथित बयान के सामने आने के बाद समाज में आक्रोश और बढ़ गया है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि भगवान परशुराम शोभायात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज की धार्मिक आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक है। वर्षों पुरानी इस परंपरा को किसी एक व्यक्ति विशेष की इच्छा के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता। 'समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कदम' समिति पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि ट्रस्ट के संविधान में सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों के संचालन का स्पष्ट उल्लेख है। ऐसे में भगवान परशुराम शोभायात्रा जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजन से दूरी बनाना समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कदम माना जा रहा है। बैठक में मौजूद सदस्यों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस विषय में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो समाज स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा और आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि भगवान परशुराम शोभायात्रा हर हाल में निकाली जाएगी। इस बैठक में समिति अध्यक्ष मुकेश शर्मा सहित रामगोपाल शर्मा, राजेश शर्मा, राजेंद्र शर्मा, प्रशांत तिवारी, नरेंद्र पाराशर, प्रखर मुद्गल, प्रमोद भारद्वाज, नंदकिशोर शुक्ला, हरिशंकर शर्मा, केके शर्मा, राम शर्मा, बनवारी शर्मा, पीयूष शर्मा, देवेश शर्मा, सतीश शर्मा, कालीचरण, पप्पू, धन सिंह और बड़ी संख्या में अन्य समाजबंधु मौजूद रहे।