राजस्थान में ऐसा सरकारी हॉस्पिटल भी है जिसमें अटेंडेंट अपने मरीजों को साइकिल, स्कूटी-बाइक पर इमरजेंसी वार्ड तक लाते-ले जाते हैं। ऐसा स्ट्रेचर-व्हील चेयर की कमी के कारण नहीं होता, बल्कि लोगों को यह डर सताता है कि अस्पताल की पार्किंग से उनका वाहन चोरी न हो जाए। यह डीग का जिला अस्पताल है। शनिवार दोपहर एक बुजुर्ग अटेंडेंट साइकिल को इमरजेंसी वार्ड तक ले आया और वहां से अपनी पत्नी को साइकिल पर बैठकार ले गया। इसका वीडियो भी सामने आया। इसे लेकर हॉस्पिटल के PMO जितेंद्र फौजदार ने कहा- हां, एक बुजुर्ग अटेंडेंट साइकिल को इमरजेंसी वार्ड तक ले आया था। वहां से मरीज को ले गया। लोग बाइक भी हॉस्पिटल के अंदर तक ले आते हैं। क्या करें? बाहर से उनकी गाड़ी चोरी हो जाए तो? हम उन्हें (अटेंडेंट को) कैसे रोक सकते हैं? साइकिल लेकर अक्सर आता है बुजुर्ग PMO डॉ. जितेंद्र फौजदार ने बताया-यह वीडियो डीग हॉस्पिटल का ही है। बुजुर्ग व्यक्ति पत्नी को दिखाने 4 से 5 दिन में अस्पताल आता रहता है। हालांकि उनके बारे में जानकारी नहीं है कि वह कौन है। उसके बारे में पूछताछ करेंगे। अभी तो उसकी डिटेल नहीं है। अगर कल-परसों में ये आया तो इसके बारे में पता लगाएंगे। बाकी हम साइकिल को नहीं रोक सकते। पीएमओ बोले- हम अटेंडेंट को ये नहीं कह नहीं सकते कि मरीज को घसीटकर ले जाओ। कई लोग तो बाइक तक अंदर ले आते हैं। गार्ड नहीं होता तो अंदर चली जाती हैं गाड़ियां अस्पताल के पास रहने वाले सुरेश ने बताया- अस्पताल के अंदर पार्किंग की जगह नहीं है। यहां आने वाले लोग, कर्मचारी, डॉक्टर, मरीज-अटैंडेंट बाहर सड़क पर ही अपनी गाड़ियां पार्क करते हैं। हालांकि अस्पताल के बाहर सिक्योरिटी गार्ड रहता है। वह किसी को भी गाड़ी अंदर ले जाने की परमिशन नहीं देता। वाहनों को बाहर ही रोक देता है। लेकिन कभी गार्ड न हो तो लोग गाड़ियां अंदर ले जाते हैं। पुलिस बोली-वाहन चोरी के मामले कम डीग हॉस्पिटल के बाहर से गाड़ी चोरी होने के डर को लेकर डीग कोतवाली थाना अधिकारी राम नरेश मीणा ने बताया- जिला अस्पताल के बाहर से वाहन चोरी होने के मामले कम ही सामने आए हैं। हालांकि गाड़ियां अस्पताल के बाहर पार्क होने से आए दिन जाम की समस्या जरूर पैदा हो जाती है।