राजस्थान के मानसिक स्वास्थ्य शोधकर्ता और शिवयोग आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनकी किताब 'द प्रैक्टिस ऑफ इम्मोर्टलिटी' को 2026 के प्रतिष्ठित नॉटिलस बुक अवार्ड में गोल्ड अवार्ड मिला है। पूर्वी अध्यात्म (स्पिरिचुअलिटी ऑफ ईस्टर्न थॉट) कैटेगरी में मिले इस सम्मान के बाद डॉ. ईशान शिवानंद का नाम उन वैश्विक हस्तियों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें पहले भी यह सम्मान मिल चुका है। इनमें दलाई लामा, मलाला युसुफजई और एकहार्ट टोले जैसे नाम शामिल हैं। बरसों की साधना पर आधारित है किताब बताया गया कि 'द प्रैक्टिस ऑफ इम्मोर्टलिटी' कोई सैद्धांतिक किताब नहीं, बल्कि डॉ. ईशान शिवानंद की वर्षों की साधना और अनुभवों पर आधारित संस्मरण है। उन्होंने यह ज्ञान अपने पिता और गुरु के सानिध्य में प्राप्त किया, जिसे बाद में उन्होंने 'योगा ऑफ इम्मोर्टल्स' पद्धति के रूप में विकसित किया। वैज्ञानिक शोध में भी मिली मान्यता डॉ. ईशान शिवानंद का दावा है कि उनकी 'योगा ऑफ इम्मोर्टल्स' पद्धति को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित शोधों में भी प्रभावी माना गया है। इसी ज्ञान और साधना को वह पिछले करीब 20 साल से शिवयोग कम्युनिटी के माध्यम से राजस्थान के लोगों तक पहुंचा रहे हैं। रिलीज होते ही बनी बेस्ट सेलर मई 2025 में प्रकाशित होने के बाद यह किताब 'यूएसए टुडे' की नेशनल बेस्ट सेलर बनी। भारत में भी यह अमेजन पर पहले ही सप्ताह में नंबर-1 पर पहुंच गई। फिलहाल यह किताब 15 देशों में उपलब्ध है और हिंदी व मराठी सहित सात भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है।