डूंगरपुर जिले के आरटीओ ऑफिस में 15 लाख रुपए की लागत से अत्याधुनिक स्वचालित (ऑटोमैटिक) ड्राइविंग ट्रैक बनकर तैयार हो गया है। इस ट्रैक के शुरू होते ही ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष हो जाएगी। अब लाइसेंस टेस्ट में पास या फेल का फैसला इंस्पेक्टर नहीं, बल्कि सेंसर और कंप्यूटर सिस्टम करेगा। साथ ही फेस आईडी तकनीक और स्लॉट बुकिंग जैसी सुविधाओं से आवेदकों को लंबी कतारों से राहत मिलेगी। आरटीओ कार्यालय में तैयार हुआ हाईटेक ट्रैक डूंगरपुर जिले के आरटीओ कार्यालय में नया अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक तैयार कर लिया गया है। यह ट्रैक आधुनिक तकनीक से लैस है, जिससे ड्राइविंग टेस्ट की पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक आसान और भरोसेमंद बनेगी। सेंसर और कैमरे रखेंगे हर गतिविधि पर नजर जिला परिवहन अधिकारी मनीष माथुर ने बताया कि इस ट्रैक पर आधुनिक सेंसर और कैमरे लगाए गए हैं। टेस्ट के दौरान वाहन की हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जाएगी। यदि चालक नियमों के अनुसार वाहन चलाएगा तो सिस्टम स्वतः उसे पास घोषित करेगा, जबकि गलती होने पर फेल का परिणाम सामने आएगा। इंस्पेक्टर की भूमिका केवल निगरानी तक सीमित नई व्यवस्था में इंस्पेक्टर या डीटीओ की भूमिका केवल निगरानी तक सीमित रहेगी। पहले जहां पास-फेल का निर्णय अधिकारियों पर निर्भर होता था, अब यह पूरी तरह कंप्यूटर सिस्टम द्वारा सेंसर से मिले डेटा के आधार पर होगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और पक्षपात की संभावना खत्म होगी। फेस आईडी से होगी पहचान, स्लॉट बुकिंग की सुविधा ड्राइविंग टेस्ट शुरू करने से पहले आवेदक की पहचान सुनिश्चित करने के लिए फेस आईडी तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा आवेदक अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन स्लॉट बुक कर सकेंगे। इससे लंबी कतारों और अनावश्यक इंतजार से राहत मिलेगी। सारथी सॉफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा ट्रैक मनीष माथुर ने बताया कि फिलहाल इस ट्रैक को 'सारथी' सॉफ्टवेयर के साथ एकीकृत करने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यालय से अनुमति मिलते ही इसे आम जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा। सड़क सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा इस नई तकनीक से केवल कुशल और योग्य चालक ही ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे। इससे सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा मिलेगा और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।