एक्सीडेंट या किसी हादसे के बाद मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने और उसकी जिंदगी बचाने के लिए 108 एंबुलेंस चल रही है। लेकिन डूंगरपुर जिले में खटारा और कबाड़ एम्बुलेंस मरीजों की जान कैसे बचाएगी। ऐसे कई सवाल खड़े हो रहे है। एम्बुलेंस की हालत ऐसी है कि उसमें न तो मेडिकल किट है और न ही ऑक्सीजन। गेजी एंबुलेंस का 5 महीने पहले एक्सीडेंट के बाद यूपी नंबर की बैकअप एम्बुलेंस दे दी। इसकी सीटे तक फटी हुई है। हाल ये है कि दरवाजा तक पट्टी या रस्सी से बांधकर रखना पर रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान तक नहीं है और न ही एम्बुलेंस चलाने वाली एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। बैकअप में मिली 3 एम्बुलेंस, तीनों कबाड़ डूंगरपुर जिले के गेजी 108 एम्बुलेंस की हालत सबसे खराब है। ये एंबुलेंस यूपी नंबर की है। जिसे 3 नवंबर 2025 में गेंजी एम्बुलेंस के एक्सीडेंट होने के बाद बैकअप में दी गई है। यहां अब तक बैकअप में 3 एम्बुलेंस आई है। सभी यूपी नंबर की। लेकिन इनकी हालत देखे तो बहुत ही खराब और कंडम है। ये एम्बुलेंस गेजी सीएचसी पर खड़ी है। गेजी सीएचसी पर खड़ी 3 एम्बुलेंस, सीटें फटी-मेडिकल किट तक नहीं भंगार होने के बावजूद सिर्फ खानापूर्ति के लिए इसका संचालन बताया जा रहा है। जबकि मरीजों की जान बचाने के कोई उपकरण इसमें है ही नहीं। एंबुलेंस के अंदर की सीट पूरी तरह से फट गई है। अंदर से गद्दी ओर लोहे की शीट निकल आई है। वही एम्बुलेंस में सबसे जरूरी मेडिकल किट होता है जो घायल या किसी भी घायल की जान बचाने के लिए जरूरी है। लेकिन एम्बुलेंस में मेडिकल किट तक नहीं है। कीट रखने के बॉक्स की हालत देखकर ही एम्बुलेस का पता लगाया जा सकता है। ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं, गेट को रस्सी बांधा हुआ वही किसी गंभीर मरीज के ऑक्सीजन की जरूरत होने पर इसमें सिलेंडर ही नहीं है। ऐसे में एम्बुलेंस का कोई महत्व ही नहीं रहता है। वही एम्बुलेंस के दरवाजे की हालत देखे तो इसे रस्सी और मेडिकल पट्टी से बांधकर रखा गया है। मरीज को बैठाने के बाद इसे वापस बांधना पड़ता है। चलती फिरती कंडम एम्बुलेंस से सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। CMHO बोले- जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से एम्बुलेस संचालन करने वाली एजेंसी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई तक नहीं की गई है। गेजी एम्बुलेंस की तरह ही जिले में चल रही अन्य कई एम्बुलेंस के हाल भी ऐसे ही है। लेकिन इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। जबकि जरूरी उपकरण नहीं होने पर जुर्माने का प्रावधान है। वही सीएमएचओ डॉ. अलंकार गुप्ता ने कहा कि एम्बुलेंस के बारे में जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।