डूंगरपुर में दो साल पहले चांदीपुरा वायरस के संदिग्ध संक्रमण से बच्चों की मौत के बाद एक बार फिर इसी वायरस ने दस्तक दी है। सीमलवाड़ा ब्लॉक के रतनपुरा गांव में छह साल की एक बच्ची की संदिग्ध संक्रमण से मौत हो गई। बच्ची के सैंपल जांच के लिए पुणे की वायरोलॉजिकल लैब भेजे गए हैं। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में चिकित्सा टीम तैनात कर सर्वे, सैंपलिंग और दवा वितरण शुरू कर दिया है। वहीं, पशुपालन विभाग भी प्रभावित क्षेत्र में स्प्रे और जांच अभियान चला रहा है। 70 प्रतिशत घरों में मवेशियों के साथ रहने से बढ़ा खतरा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आदिवासी बहुल डूंगरपुर और बांसवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में करीब 70 प्रतिशत घर ऐसे हैं, जहां परिवार और मवेशी एक साथ या आसपास रहते हैं। एपिडिमियोलॉजिस्ट शमसुजोहा ने बताया कि चांदीपुरा वायरस रेतीली मक्खी (सैंड फ्लाई) के काटने से फैलता है। यह मक्खी सामान्य मक्खी से छोटी और भूरे रंग की होती है तथा मवेशी घरों में अधिक पाई जाती है। ऐसे में जिन घरों के पास मवेशी रहते हैं, वहां संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। दो साल पहले भी हुई थीं बच्चों की मौत जुलाई 2024 में डूंगरपुर जिले के रामसोर और बालदिया गांव के दो बच्चों तथा उदयपुर जिले के कल्याणपुर गांव के एक बच्चे की चांदीपुरा वायरस के संदिग्ध संक्रमण से मौत हुई थी। अब दो साल बाद सीमलवाड़ा क्षेत्र में नया मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग फिर सतर्क हो गया है। बच्चों पर सबसे ज्यादा असर, दिमाग तक पहुंचता है संक्रमण विशेषज्ञों के अनुसार चांदीपुरा वायरस का संक्रमण मुख्य रूप से 15 सालों से कम उम्र के बच्चों में अधिक देखा जाता है। संक्रमण होने पर तेज बुखार, दौरे (ताण), दिमाग की झिल्ली में सूजन और गंभीर स्थिति में मरीज कोमा में भी जा सकता है। सीएमएचओ डॉ. अलंकार गुप्ता ने बताया कि संदिग्ध मामला सामने आने के बाद गांव में लगातार चिकित्सा टीम निगरानी कर रही है और जरूरत के अनुसार सैंपल लेकर उपचार दिया जा रहा है। दही-चावल खाने के बाद बिगड़ी तबीयत, गुजरात में तोड़ा दम एपिडिमियोलॉजिस्ट शमसुजोहा ने बताया कि 13 जुलाई की शाम बच्ची ने घर का खाना खाने से मना कर दिया। इसके बाद उसकी मां पड़ोसी के घर से दही-चावल लेकर आई, जिसे खाने के कुछ घंटे बाद रात करीब 10:30 बजे बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे तेज ठंड लगने लगी और उल्टियां होने लगीं। परिजन पहले सीमलवाड़ा के निजी अस्पताल, फिर गुजरात के मेघरज, मोडासा और बाद में हिम्मतनगर सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चांदीपुरा वायरस की आशंका पर सैंपल लिए गए, लेकिन इलाज के दौरान 15 जुलाई को शाम 4:52 बजे बच्ची की मौत हो गई। पशुपालन विभाग भी मैदान में, स्प्रे और कैंप शुरू पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. दिनेशचंद्र बामनिया ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में विभाग की टीम भेज दी गई है। मवेशी घरों में रेतीली मक्खियों को खत्म करने के लिए स्प्रे कराया जा रहा है तथा पशुओं को आवश्यक इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। सोमवार से विशेष पशु स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर पशुओं के सैंपल भी लिए जाएंगे। विशेषज्ञों की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि मवेशी घरों और आसपास के क्षेत्रों की नियमित सफाई, कीटनाशक स्प्रे, बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाना तथा तेज बुखार या दौरे आने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना ही संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।