अमीरों के घर खुशियां लाने के लिए नाबालिगों की कोख से अंडों की तस्करी की जा रही है। भास्कर रिपोर्टर ने 1 साल, 9 महीने तक दलालों का पीछा किया। स्टिंग में खुलासा हुआ कि दलालों के जरिए नाबालिगों के अंडे खरीदे-बेचे जा रहे हैं। अंडा तस्करी रैकेट से जुड़े डॉक्टर के पास रिपोर्टर अपनी पत्नी को लेकर पहुंचा। आईवीएफ में अंडे की जरूरत बताई। डॉ. नीना सक्सेना ने प्रीमियम डोनर के लिए 2 लाख रुपए मांगे। कई एग डोनर की फोटो तक दिखाई। कहा, सभी हाई-प्रोफाइल हैं। वही फोटो रिपोर्टर के वॉट्सएप पर भी भेजी। ऑनलाइन 20 हजार रुपए एडवांस लिए। आईवीएफ खर्च 5 से 6 लाख रुपए बताया। भारत में अंडों को बेचना या खरीदना गैरकानूनी है। डोनर की उम्र 23 से कम नहीं होनी चाहिए। साथ ही पहचान उजागर नहीं की जा सकती। लेकिन यहां सब कुछ किया जा रहा है। भास्कर की पड़ताल में पढ़िए- दलाल 13-15 साल की बच्चियों के आधार कार्ड में उम्र बदल अंडे खरीद-बेच रहे हैं। निशाने पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की कम उम्र की लड़कियां हैं। सवाल... कम उम्र की लड़कियों के ही एग क्यों लेते हैं? जवाब...कम उम्र की लड़कियों के अंडे सबसे अच्छे क्वालिटी के बनते हैं। ग्रो करने में ज्यादा दवाई या अन्य खर्च नहीं आता है। सबसे पहले तैयार कराई एक रिपोर्ट उदयपुर के अमर आशीष हॉस्पिटल जाने से पहले रिपोर्टर ने कई गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह पर रिपोर्ट तैयार कराई। सोनोग्राफी कराई। रिपोर्ट में लिखा गया कि ओवरी में एग तैयार नहीं हो रहा। डोनर के एग से ही बच्चा हो सकता है। रिपोर्ट डॉ. नीना सक्सेना को दिखाई गई। रिपोर्टर ने अच्छे एग की बात कही। डॉक्टर ने प्रीमियम डोनर का खर्च 2 लाख बताया। कई डोनर की फोटो भेजी। इनमें कम उम्र की लड़कियां भी थीं। पसंद के बाद 50 हजार एडवांस मांगे। रिपोर्टर ने 20 हजार एडवांस दिए। डॉक्टर ने पत्नी की सोनोग्राफी और ब्लड टेस्ट कराने को कहा। महिला दलालों के नेटवर्क में रहा रिपोर्टर, 13 साल की बच्ची की उम्र आधार में 25 की दलाल जांच के नाम पर लड़कियों को बुलाते हैं। फिर 25 हजार से 30 हजार रुपए का लालच देते हैं। ई-मित्र केंद्रों से बच्चियों के आधार में उम्र बढ़ा देते हैं। भास्कर रिपोर्टर एक महिला के सहयोग से 10 महिला दलालों के नेटवर्क में रहा। इसमें पूजा यादव, प्रियांशी, बरखा, शाहिन शामिल थीं। ये लड़कियों को लालच देकर एग डोनेट करवाती हैं। दलाल ने बदला लड़कियों का नाम रिपोर्टर ने दो लड़कियों के अंडेदान के नाम पर दलाल से संपर्क किया। महिला दलाल ने लड़कियों का नाम भी बदल दिया। जन्मतिथि 21 दिसंबर 2012 से 5 जनवरी 2000 कर दी। चंदा (बदला नाम) की जन्मतिथि 15 जनवरी 2011 थी। इसे 25 जनवरी 1999 कर दिया। दलाल उन्हें एग डोनेट की प्रक्रिया के लिए आईवीएफ सेंटर ले गई। रिपोर्टर ने बहाना बनाकर आखिरी वक्त पर प्रक्रिया रुकवा दी। अंडादान बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन लगा रहे, आधार और शपथ पत्र भी नकली दे रहे हैं अंडादान बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। सुनिता ने बताया कि अंडेदान पर 25 हजार रुपए मिले थे। थायराॅइड और अस्थमा था। रिपोर्ट में जानकारी छुपा दी। 9 दिनों तक सेंटर में रखा। रोज इंजेक्शन लगे। कम उम्र की लड़कियां भी थीं। कुछ ने 3-3 बार अंडे डोनेट किए थे। उसे ओवरी देने के लिए 3.50 लाख देने की बात भी कही। अहमदाबाद में किसी को चाहिए था। गुजरात से भी लड़कियां आती थीं। उदयपुर के कंडाल खानमीन की शारदा ने 16 साल की उम्र में एग डोनेट किया। भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. नीरज चौधरी (गायनेकोलॉजिस्ट) आईवीएफ सेंटर या बैंक डोनर की फोटो, नाम साझा नहीं कर सकता। महिला जीवनकाल में केवल एक बार ही अंडाणु दान कर सकती है। अंडाणु बनाने वाले हार्मोनल इंजेक्शन किशोरों के नाजुक शारीरिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। इसमें अंडाशय में सूजन आ जाती है। महिला की प्रजनन क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है। पहचान उजागर करने पर 3 साल तक जेल और 5 लाख तक का जुर्माना है। अंडाणु या शुक्राणु खरीदने-बेचने पर 5 से 10 लाख रुपए जुर्माना है।