आचार्य निर्भय सागर के शिष्य मुनि गुरुदत्त सागर और क्षुल्लक मेरुदत्त सागर ससंघ संत भवन में विराजमान हैं। रविवार को उनके सान्निध्य में जैन जोड़ला मंदिर में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा श्रद्धा-भक्ति से संपन्न हुई। इसके बाद धर्मसभा हुई। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। धर्मसभा में मुनि गुरुदत्त सागर ने कहा कि कुम्हार साधारण मिट्टी को छानता है, संवारता है, आकार देता है। फिर वही मिट्टी दीपक, घट, मूर्ति बन जाती है। गुरु भी अज्ञान जैसे जीवन को ज्ञान से श्रेष्ठ बनाते हैं, संस्कार देते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को जन्म देना ही काफी नहीं है। उन्हें धर्म के संस्कार देने जरूरी हैं। भगवान की भक्ति का भाव देना जरूरी है। देव-शास्त्र-गुरु के प्रति श्रद्धा जरूरी है। जिनवाणी के अध्ययन की आदत भी जरूरी है। मुनि ने कहा कि गुरु कुम्हार जैसे होते हैं। पतित और अज्ञानी आत्मा को ज्ञान का रास्ता दिखाते हैं। मोक्ष की यात्रा की ओर बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि जब जीवन के सभी रास्ते बंद हो जाएं, तब धर्म का रास्ता खुला रहता है। जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन अभी शुरू ही नहीं हुआ। धर्मसभा के बाद मुनि की आहारचर्या हुई। संत भवन में रोज श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक और ज्ञानवर्धक कक्षाएं चल रही हैं। इनमें धर्म, संस्कार, आचार-विचार, आध्यात्मिक ज्ञान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे पूर्व शनिवार को जैन जोड़ला मंदिर में गुरुदत्त सागर महाराज के 7वें दीक्षा जयंती महोत्सव पर संगीतमय धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने धर्मलाभ लिया। दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष विनोद बड़जात्या ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। इसके बाद आचार्य के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट आदि कार्यक्रम हुए। संगीतमय विशेष पूजन में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक मंडलों ने निर्धारित क्रम के अनुसार अर्घ समर्पित किए। मंत्री अनिल बड़जात्या ने बताया कि अग्रवाल जैन महिला मंडल ने महाअर्घ समर्पित किया। मुनि गुरुदत्त सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में गुरु महिमा, संयम, आत्मकल्याण एवं धर्म आराधना का संदेश देते हुए कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही जीवन को सफल एवं सार्थक बनाया जा सकता है। उन्होंने चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धर्म आराधना, स्वाध्याय एवं तप करने की प्रेरणा दी। सांस्कृतिक संयोजक अंकित पाटनी ने बताया कि कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज, खंडेलवाल दिगंबर जैन समाज, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी, महिला मंडल, युवा वर्ग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।