शरीर और दिमाग को तुरंत एक्टिव करने, एकाग्रता बढ़ाने और कमजोरी दूर करने जैसे दावों के कारण युवाओं में एनर्जी ड्रिंक का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें मौजूद कैफीन और शुगर का अधिक सेवन हृदय गति बढ़ने, नींद न आने, बेचैनी, डिहाइड्रेशन और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसी चिंता के बीच महाराष्ट्र सरकार ने स्कूल-कॉलेजों के 500 मीटर दायरे में स्टिंग समेत छह प्रमुख एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक लगा दी है। अब राजस्थान में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग उठने लगी है। सामाजिक कार्यकर्ता राजन चौधरी ने कहा कि हमारे बच्चे भी कैफीन का सेवन कर रहे है, वे देश का भविष्य हैं। महाराष्ट्र की तर्ज पर राजस्थान में भी स्कूल-कॉलेजों के आसपास 500 मीटर के दायरे में एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री, मुख्य सचिव और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग के आयुक्त से मुलाकात करेंगे। भ्रामक प्रचार पर एफएसएसएआई का नोटिस भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. पुनीत सक्सेना, SMS और डॉ. अशोक गुप्ता, जेके लोन अस्पताल, जयपुर -एनर्जी ड्रिंक में मौजूद कैफीन, शुगर, कृत्रिम रंग और अन्य एडिटिव्स बच्चों व युवाओं की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। अधिक सेवन से हृदय गति बढ़ना, अनिद्रा, बेचैनी, हाई ब्लड प्रेशर और डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों और कम उम्र के बच्चों को ऐसे पेय से बचना चाहिए। “बच्चों की सेहत की सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र के निर्णय का अध्ययन किया जाएगा। नियमानुसार 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए एनर्जी ड्रिंक प्रतिबंधित हैं।” -भगवत सिंह, अतिरिक्त आयुक्त ( फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोल) “एफएसएसएआई दिल्ली के अनुसार कैफीनेटेड बैवरेज का भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। स्टीमूटेटीस माइंड, एनर्जी बॉडी, स्पोर्टस ड्रिंक के लेबल पर उल्लेख करना उल्लंघन की श्रेणी में आता है।” -डॉ. विजय प्रकाश शर्मा, संयुक्त आयुक्त ( फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोल)