महिला थानाधिकारी अभिलाषा लोगों की सुरक्षा में मुस्तैद रहकर कानून की रक्षा के साथ ही इंसानियत का फर्ज भी निभा रही है। वे गश्त के दौरान न केवल अपराध रोकने में सक्रिय रहती है, बल्कि फुटपाथ पर सोने वाले बेसहारा लोगों की मदद करती है। दरअसल झुंझुनूं महिला थानाधिकारी अभिलाषा ड्यूटी के साथ ही खाकी पहनकर एक नई मिसाल कायम कर रही है। अक्सर अपराध पर नजर रखने के लिए रात में पुलिस की गश्त होती है। महिला थानाधिकारी अभिलाषा के लिए ये गश्त सेवा को मौका बन गई है। आमतौर पर पुलिस को कानून व्यवस्था संभालने और अपराधियों पर कार्रवाई करते देखा गया है। लेकिन रात्रिकालीन गश्त करती महिला थानाधिकारी अभिलाषा सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं संभाल रही हैं। बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि शहर में कोई बेसहारा व्यक्ति भूखा न सोए। अक्सर पुलिस पर सख्ती और संवेदनशीलता के सवाल खड़े किए जाते हैं लेकिन महिला थानाधिकारी अभिलाषा की पहल उस नजरिए को बदल रही है। इस मानवीय चेहरे ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था को लागू करने वाली ही नहीं है। बल्कि समाज और लोगों के साथ खड़ी रहने वाली संवेदनशील ताकत भी है। अभिलाषा का मानवीय रूप पुलिस की छवि को नई पहचान दे रहा है। थानाधिकारी अभिलाषा बताती है कि गश्त के दौरान हमेशा पांच से दस डाइट बनाती हूं। इनको गाड़ी में रखवाते है। गश्त के दौरान फुटपाथ व सार्वजनिक स्थानों पर कोई बेसहारा भूखा मिल जाता है तो उसे यह भोजन का पैकेट पकड़ा देती है। सर्दियों के मौसम में वे कंबल व शॉल भी गाड़ी में रखती है। जिस दिन फुटपाथ पर कोई भोजन लेने वाला नहीं मिलता है। उस खाने को सुबह गायों को खिला देती है। एसआई अभिलाषा का कहना है कि बचपन में परिवार से मिले संस्कार की वजह से वे अपनी ड्यूटी के साथ ही असहाय व बेसहारा लोगों की मदद करती है। परिवार में खुशी के मौके पर अनाथ आश्रम व ऐसे स्थान जहां जरूरतमंद लोग व बच्चे रहते है उनके बीच जाकर सेलिब्रेट करती है। अभिलाषा का कहना है कि जरूरतमंद बालिकाओं व बच्चों को पढ़ाई के लिए मदद करना चाहती है। उनके पति एसआई मुकेश किलानियां भी उन्हें प्रोत्साहित करते है। वे भी गरीब तबके के बच्चों को कोचिंग दिलाते है।