हनुमानगढ़ जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में करोड़ों रुपए के कथित फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की अचानक छापेमारी के बाद पल्लू थाना में एसबीआई पल्लू शाखा के बैंक कर्मियों समेत 165 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि फर्जी किसान खाते खोलकर करीब 9 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम जारी करवाया गया। एक ही मोबाइल नंबर से कई खाते संचालित करने, समान केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने और गैर किसानों को ऋणी दिखाकर बीमा राशि हासिल करने जैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कृषि मंत्री की रेड के बाद मचा हड़कंप बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अचानक एसबीआई पल्लू शाखा पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच की। छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड संदिग्ध मिले, जिसके बाद कृषि विभाग की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। फर्जी किसान बनाकर जारी कराया गया करोड़ों का क्लेम प्रारंभिक जांच में सामने आया कि 162 लोगों के नाम पर बैंक खाते खोलकर उन्हें किसान और ऋणी दर्शाया गया। बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों के पटवार मंडलों की ऑफलाइन कृषि भूमि के फर्जी खाता, खसरा और मुरब्बा नंबर दर्ज कर इन लोगों को किसान बताया गया। इसके बाद खरीफ 2025 की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मूंगफली फसल का प्रीमियम जमा कराया गया और करीब 9 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम जारी करवा लिया गया। जांच में पता चला कि जिन लोगों के नाम पर खाते खोले गए, वे वास्तविक किसान नहीं हैं और उनके नाम पर दर्ज भूमि पल्लू क्षेत्र के राजस्व रिकॉर्ड में कहीं मौजूद नहीं है। एक मोबाइल नंबर से चल रहे थे कई खाते जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि एक ही मोबाइल नंबर से कई बैंक खाते संचालित किए जा रहे थे। इसके अलावा समान केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर कई खाते खोले गए। पुलिस को आशंका है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा सुनियोजित तरीके से किया गया। सूत्रों के मुताबिक, बैंक कर्मचारियों, कथित एजेंटों, संदिग्ध खाताधारकों और दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों की मिलीभगत से यह नेटवर्क काम कर रहा था। तुरंत एक्शन से रुका करोड़ों का भुगतान गुरुवार को छापेमारी के दौरान कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि समय रहते कार्रवाई होने से करोड़ों रुपए की क्लेम राशि संदिग्ध खातों में ट्रांसफर होने से बच गई। उन्होंने कहा कि यदि यह फर्जीवाड़ा समय पर पकड़ में नहीं आता तो सरकारी योजना के करोड़ों रुपए गलत हाथों में चले जाते। डिजिटल रिकॉर्ड और ट्रांजेक्शन की फॉरेंसिक जांच शुरू पुलिस और तकनीकी एजेंसियां अब कोर बैंकिंग सिस्टम, डिजिटल ट्रांजेक्शन ट्रेल और संदिग्ध दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच में जुट गई हैं। खातों की पूरी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाली जा रही है। इसके साथ ही आधार, जनाधार, मोबाइल नंबर और भूमि रिकॉर्ड का क्रॉस वेरिफिकेशन भी शुरू कर दिया गया है। राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक खेती क्षेत्र के मिलान के लिए तकनीकी जांच कराई जा रही है। बढ़ सकती है आरोपियों की संख्या सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। फिलहाल पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और सरकारी योजना में अनियमितता समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद जिले में हड़कंप मचा हुआ है और अब पूरे मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।