मांडलगढ़ किले की जीर्ण-शीर्ण दीवार एवं मुख्य गेट जिसका दरवाजा हटा दिया गया है। गेट पर भाले लगे थे तोप को भी हटा दिया । भीलवाड़ा | कभी शौर्य, स्थापत्य और वैभव का प्रतीक रहा ऐतिहासिक मांडलगढ़ किला अब बदहाल है। समय की मार, उपेक्षा और संरक्षण के अभाव में यह धरोहर धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही है। किले की कई दीवारें धराशायी हो चुकी हैं, तो कई हिस्सों में पत्थर उखड़कर नीचे गिर रहे हैं। किले के भीतर प्रवेश करते ही टूटती दीवारें, जर्जर बुर्ज और बिखरे पत्थर इसकी दर्दनाक स्थिति बयां करते हैं। जिन झरोखों से कभी पूरा मांडलगढ़ कस्बा नजर आता था, आज वे झरोखे मलबे और बंद संरचनाओं में तब्दील हो चुके हैं। कभी ये झरोखे किले की पहचान माने जाते थे, जहां से सैनिक दूर-दूर तक निगरानी करते थे। अब वहां सन्नाटा पसरा है। इतिहासकारों का मानना है कि मांडलगढ़ किला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुर्ग के परकोटे, बुर्ज, महल, मंदिर और प्राचीन संरचनाएं लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं।