खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़बास क्षेत्र के बखथला गांव के खिलाड़ी जुबेर खान ने अपने संघर्ष, मेहनत और जुनून के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जुबेर खान का चयन भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में हुआ है, जिसके बाद पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है। राजस्थान से कुल चार खिलाड़ियों का चयन भारतीय टीम में हुआ है, जिनमें दो खिलाड़ी अलवर जिले से हैं। ऐसे में यह उपलब्धि जिले और प्रदेश दोनों के लिए खास मानी जा रही है। श्रीलंका के कोलंबो में दिखाएंगे दम भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम 26 से 28 मई तक श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित इंटरनेशनल 3T-20 सीरीज में हिस्सा लेगी। इस प्रतियोगिता में जुबेर खान भारत की ओर से ऑलराउंडर खिलाड़ी के रूप में मैदान में उतरेंगे। टीम के सभी खिलाड़ियों को 25 मई को चेन्नई एयरपोर्ट पर रिपोर्ट करना है, जहां से भारतीय दल श्रीलंका के लिए रवाना होगा। जुबेर का चयन लायन व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन (इंडिया) द्वारा जारी आधिकारिक सूची में किया गया है। संघर्षों से भरा रहा जुबेर का सफर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले जुबेर खान का सफर आसान नहीं रहा। बचपन में जब गांव के बच्चे क्रिकेट खेलते थे, तो वह भी उनके साथ खेलने की इच्छा रखते थे, लेकिन दिव्यांग होने के कारण उन्हें साथ नहीं खिलाया जाता था। ऐसे में वह दूर बैठकर मैच देखा करते थे। हालांकि, इन परिस्थितियों ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया। भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबले देखकर उनके मन में देश के लिए खेलने का सपना जागा और उसी सपने को सच करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत शुरू कर दी। घर की छत पर शुरू की प्रैक्टिस जुबेर खान ने अपने घर की छत पर नेट लगाकर व्हीलचेयर के साथ क्रिकेट अभ्यास शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी लगन और मेहनत को देखकर एक दोस्त ने उन्हें अलवर में ट्रायल देने का मौका दिलाया। यहीं से उनके क्रिकेट करियर को नई दिशा मिली और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अलवर से राजस्थान टीम तक का सफर जुबेर खान ने पहले अलवर जिला व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में जगह बनाई। इसके बाद शानदार प्रदर्शन के दम पर राजस्थान टीम में चयन हुआ। वर्ष 2016 से वह लगातार राजस्थान टीम का हिस्सा हैं और कई मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है। सुविधाओं की कमी के बीच बनाई पहचान जुबेर खान बताते हैं कि किशनगढ़बास और आसपास के क्षेत्र में खेल मैदानों और आधुनिक सुविधाओं की कमी हमेशा चुनौती रही। बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें कई बार जयपुर कैंप जाना पड़ता था, लेकिन दूरी और संसाधनों की वजह से यह हर बार संभव नहीं होता था। इसके बावजूद स्थानीय अकादमियों, कोच और परिवार के सहयोग से उन्होंने अपने खेल को लगातार निखारा।