शादी के बाद सरकारी दस्तावेजों, विशेषकर विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना और महीनों का इंतजार करना एक आम बात है। लेकिन बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायत बालेरा ने इस ढर्रे को पूरी तरह बदलकर एक अनूठी मिसाल पेश की है। बालेरा में बेटियों और नवविवाहित जोड़ों के सम्मान में एक ऐसा नवाचार किया गया है कि विवाह की रस्में पूरी होते ही मंडप में ही हाथों-हाथ विवाह पंजीयन जारी कर वर-वधू को सौंप दिया जाता है। आमतौर पर शादियों के सीजन में वर और वधू पक्ष दोनों ही रस्मों-रिवाजों और मेंहमान नवाजी में व्यस्त रहते हैं। इस व्यस्तता के बीच शादी के तुरंत बाद प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना एक बोझिल काम बन जाता है। ग्राम पंचायत बालेरा ने इसका बेहद सरल समाधान निकाला है। विवाह तय होने पर ग्राम पंचायत प्रशासन परिवार से संपर्क कर जरूरी दस्तावेज और फार्म पहले ही तैयार करवा लेता है। जैसे ही विवाह की रस्में पूरी होती हैं। इस मौके पर उपस्थित ग्राम विकास अधिकारी डेटा को अंतिम रूप देकर सर्टिफिकेट जनरेट कर देते हैं। विदाई से ठीक पहले, सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी की ओर से स्वयं मंडप में जाकर नए जोड़े को यह कानूनी दस्तावेज सौंप दिया जाता है। इस ऐतिहासिक नवाचार की शुरुआत 30 मई 2023 को हुई थी, जब पंचायत में पहला चंवरी मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया गया था। तब से लेकर अब तक दर्जनों जोड़े इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। अब तक 24 से अधिक सर्टिफिकेट जारी किए गए है। प्रशासनिक सुधार व सामाजिक सुरक्षा का बेहतरीन मॉडल यह नवाचार केवल कागजी औपचारिकता को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और प्रशासनिक मायने हैं। हाथों-हाथ सर्टिफिकेट मिलने से ग्रामीणों को ई-मित्र या बिचौलियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और न ही अतिरिक्त फीस देनी पड़ती है। शादी के तुरंत बाद वैध दस्तावेज हाथ में होने से बेटियों को भविष्य में कानूनी अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ता। सरकारी योजनाओं जैसे जन-आधार, राशन कार्ड में नाम जुड़वाना या छात्रवृत्ति का लाभ तुरंत मिलने लगता है। इस पूरे नवाचार को धरातल पर उतारने का श्रेय बालेरा के सरपंच अर्जुन सिंह और ग्राम विकास अधिकारी गिरधर सिंह रांदा को है। रांदा खुद विवाह के मौके पर उपस्थित रहकर अपने हाथों से यह प्रमाण पत्र सौंपते हैं। इस प्रशासनिक संवेदनशीलता ने सरकारी तंत्र के प्रति जनता का भरोसा कई गुना बढ़ा दिया है।