जयपुर में लगी दुनियाभर के स्टूडेंट्स की पेंटिंग आकर्षण का केंद्र बन गई है। इस एग्जीबिशन में गंगाजल से बनी शिव नगरी की पेंटिंग सभी का ध्यान खींच रही है, जिसे गंगाजल आर्टिस्ट संतोष कुमार शांडिल्य ने तैयार किया है। इसके साथ मुंबई के 90 साल के कार्टूनिस्ट आबिद सूती ने नल की पेंटिंग के जरिए पानी बचाने का संदेश दिया। दक्षिण कोरिया के ऑचुल ह्वांग ने गाय को बचाने का भावनात्मक संदेश की पेंटिंग के जरिए दिया। दरअसल, जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में दो दिवसीय आर्ट एग्जीबिशन ‘सर्जना-2026’ में देश-विदेश के कलाकारों और 13 यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स द्वारा तैयार की गई 110 कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं। आगे देखिए कौनसी पेंटिंग सबसे खास… गंगाजल से शिव नगरी की पेंटिंग एग्जीबिशन में सबसे ज्यादा चर्चा बनारस की शिव नगरी की पेंटिंग की है। इसे गंगाजल से बनाया गया है। इस पेटिंग को बनाने वाले आर्टिस्ट संतोष कुमार शांडिल्य ने बताया कि वे मूल रूप से बनारस के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया- वे साल 2014 से जितनी भी पेंटिंग बना रहे हैं, उन सभी को गंगाजल से बनाया है। जो 12 ज्योतिरलिंग हैं। उनमें 11 ज्योतिरलिंग तो मंदिर हैं। लेकिन बनारस स्वयं शंभू है। ये स्वयं शिव के त्रिशुल पर टिका हुआ स्थान है। इसको ही शंभू कहा जाता है। यानि कि इस नगर को ही हम शिव मानते हैं। उन्होंने कहा- जब हम नगर की गंगाजल से पेंटिंग बनाते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे नगर को गंगाजल से चित्रित कर रहे हैं। जो एक तरीके से रुद्राभिषेक के समान है। 2 घंटे 50 मिनट तक शिव पर पानी चढ़ाने की प्रक्रिया रुद्राभिषेक कही जाती है। मैं 6-7 दिन गंगाजल से पेंटिंग करता हूं। मैं एक कलाकार के रूप में भगवान का रुद्राभिषेक करता हूं। पेंटिंग में जो गंगाजल काम लिया जाता है, वो हरिद्वार का काम लिया जाता है। उन्होंने बताया- ये पेंटिंग पूरी तरह से बनारस पर आधारित है। इसमें राण, साड़, सिड़ी और सन्यासी का चित्रण किया गया है। इसमें सीढ़ी, सन्यासी और नंदी के साथ भगवान शिव का चित्रण किया गया है। इस पेंटिंग में पूरे बनारस को दर्शाने की कोशिश की गई है। ये पेटिंग नोट फोर सेल है। ये पेटिंग पूर्णिमा विश्विविद्यालय और जयपुर आर्ट समिट की है। इस पेंटिंग को बनाने में उन्हें 7 दिन लगे। नल की पेंटिंग से पानी बचाने का संदेश एग्जीबिशन में 90 साल के कार्टूनिस्ट आबिद सूती की भी पेंटिंग लगी है। उन्होंने एक नल की पेंटिंग बनाई है। नल से निकलने वाले पानी की धारा पेड़ की जड़ के समान नजर आ रही थी। इस पेंटिंग को बनाने वाले आबिद सूती ने बताया- मैं चित्रकार, लेखक और कार्टूनिस्ट हूं। पेटिंग मेरे बचपन से खास हिस्सा रहा। ये जो पेंटिंग है, वो मेरी मुहिम का हिस्सा है। इसका अर्थ है, बूंदे खत्म हुई तो हम सब मरे। गंगा मैया को बचाना है। समुद्र को बचाना है। मेरी मुहिम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मन की बात में शामिल किया। मेरी मुहिम पीएम तक पहुंची। आखिरकर यूएनओ ने भी इस मुद्दे को उठाया। तीन साल तक यूएनओ ने ट्वीट किया। हर साल उनका ट्वीट आता था। पानी बचाने से जुड़े मेरे वीडियो प्रकाशित किए गए। आबिद सूती ने पेंटिंग के बारे में बताया- कल पानी नहीं रहा, बूंदे भी नहीं रही तो न पेड़ रहेंगे, न पौधे रहेंगे, न परिंदे रहेंगे। पेटिंग में पानी बचाने के लिए संदेश दिया है कि पानी की बर्बादी के बाद परिंदे जा रहे हैं। पेड़ की जड़े जमीन में उतरती जा रही है। लेकिन सड़ चुकी और अब इसका कोई मायने नहीं। गाय को बचाने का भावनात्मक संदेश की पेंटिंग दक्षिण कोरिया के ऑचुल ह्वांग ने पेंटिंग के माध्यम से गाय को बचाने का भावनात्मक संदेश दिया है। ऑचुल ह्वांग ने बताया- जब इंडिया घूमने आया तो देखा कि गाय सड़कों पर घूम रही है। जो काफी विचित्र लगा। ऐसा लगा कि भारत के लोग काफी खुले विचारों के हैं। यहां पर जानवरों के साथ काफी प्रेम और मेल जोल से रहते हैं। इसके बाद इस कार्यक्रम के लिए इनवाइट आया तो मन में आया कि क्यों न इस विचार को पेंटिंग के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा इस पेंटिंग के माध्यम से में यह संदेश देना चाहता हूं कि हम भले ही इंसान हैं, लेकिन हमें जानवरों और अपने आसपास के जीव जंतुओं को, पर्यावरण को और अपने पड़ोसियों सहित सभी को सम्मान से प्रेम से रहना चाहिए। रामायण सीरिज पर बनाई फड़ पेटिंग रामायण के प्रसंगों को अलवर की रहने वाली कंचन ने फड़ पेटिंग में दिखाया है। उन्होंने पूरी रामायण की सीरिज को फड़ पर कनवर्ट करके दिखाया। इसमें सजीव चित्र रामायण के प्रसंगों को बता रहे हैं। उन्होंने बताया- इसके लिए पहले उन्होंने प्लाईवुड और कॉटन का कपड़ा लगाकर बेस बनाया, फिर फड़ पेंटिंग की। उन्होंने कहा ज्यादातर देखा जाता है कि रामायण लोग टीवी पर देखते हैं। मेरी कोशिश है कि पेटिंग के माध्यम से भी लोग रामायण के प्रसंगों को समझ सके। बता दें कि पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल आर्ट कैंप के दौरान तैयार की गई इन कलाकृतियों में पेंटिंग्स, पत्थर की खूबसूरत मूर्तियां और वेस्ट मटेरियल से बनाए गए आर्ट इंस्टॉलेशन शामिल हैं। कैंप में भारत, दक्षिण कोरिया, चीन और श्रीलंका के 30 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया, वहीं देश की 12 अन्य यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट आर्टिस्ट्स की रचनात्मक भागीदारी ने इसे और खास बनाया।