जयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर बिचून के भैराणा धाम के संत 40 डिग्री तापमान में धूणी जलाकर तप कर रहे हैं। दादू संप्रदाय के संतों का ये अग्नितप राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इंवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन (रीको) के खिलाफ है। 15 अप्रैल से चल रहा ये तप सुबह 10 बजे से शुरू हो जाता है। इस दौरान कई साधु बेहोश भी हो रहे हैं, लेकिन तप जारी है। दरअसल रीको भैराणा धाम के पास फैले जंगल में अधिग्रहण कर इंवेस्टमेंट जोन बना रहा है। इसी को लेकर संत विरोध कर रहे हैं। दादू संप्रदाय के संतों का कहना है कि ये भूमि संत दादू दयाल की मोक्ष स्थली है। उनका आरोप है कि यहां पर हजारों की संख्या में पेड़ काटकर हरे-भरे जंगल को मरुस्थल में तब्दील कर दिया गया है। जीव-जंतुओं को भी दफनाया गया है। समतलीकरण करते हुए जीव-जंतुओं को जमीन में दफना दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… संतों के अनुसार लगभग 400 साल पहले संत दादू दयाल ने यहां पेड़ लगाकर वन्य जीवों के लिए आश्रय स्थल बना दिया था। यहीं पर उन्होंने तप करते हुए समाधि ली थी। दादू पंथी इसे तपोभूमि मानते हैं। इसी के चलते स्थानीय लोग और साधु संत अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। जंगल के ऊपरी हिस्से में अरावली की पहाड़ी है, जिसे स्थानीय लोग भैराणा की पहाड़ी कहते हैं। इसी पर संत दादू दयाल का मंदिर भी बना हुआ है। यहां हर साल मेला भरता है। धरने पर बैठे स्थानीय ग्रामीण पांचूदास स्वामी बताते हैं, मैं 60 साल से यहां रह रहा हूं। बचपन से यहां हरा भर जंगल और जीव-जंतु देखे हैं। दादाजी और पिताजी का अंतिम संस्कार भी दादू धाम के पास इसी जगह पर किया था। अब यहां पर सिर्फ मरुस्थल है। दादू पंथियों के लिए ये जगह हरिद्वार जैसी : संघर्ष समिति भैराणा धाम संघर्ष समिति, संतों और स्थानीय दादू पंथी लोगों के अनुसार यहां पर दादू पंथ के साधु-संत भी समाधि लेते हैं। ये जगह दादू पंथियों के लिए हरिद्वार की तरह है। यहां बहने वाले प्राकृतिक नाले में ही उनकी अस्थियां विसर्जित की जाती है। ये नाला ऊपर की पहाड़ी से बहता हुआ नीचे तक आता है। समिति के अनुसार नाले के आगे के रास्ते को रीको ने मिट्टी डालकर अवरुद्ध कर दिया है। भैराणा धाम संघर्ष समिति ने 5 अप्रैल को मौजमाबाद (जयपुर) एसडीएम को ज्ञापन व सरकार को अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद 15 अप्रैल से संतों ने अग्नितप शुरू कर दिया। डिप्टी सीएम को आत्म-दाह की चेतावनी दी थी धरना शुरू होने के बाद बाद उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा भी धरना स्थल पर गए थे। उन्होंने आश्वासन देते हुए धरना समाप्त करने की अपील की थी। संतों ने कहा- जब तक रीको के काम पर सरकार रोक नहीं लगा देती, तब तक धरना समाप्त नहीं होगा। इस दौरान कुछ संतों ने डिप्टी सीएम को आत्म-दाह की चेतावनी भी दी थी। रीको के सर्वे में झाड़ियां, मौके पर पेड़ कटे पड़े रीको की सर्वे रिपोर्ट में जंगल में सिर्फ झाड़ियों को काटने का दावा किया गया। भास्कर टीम मौके पर पहुंची तो कटे पेड़ों के ठूंठ भी पड़े दिखाई दिए। संतों ने ये भी आरोप लगाया कि जमीन को समतल करते वक्त रीको ने कई सारे पेड़ों को जमीन में दबा दिया। उनके अनुसार मौके पर 500 से अधिक खेजड़ी के पेड़ काटे गए। संतों का दावा है कि यहां पर कई तरह के वन्य जीव-जन्तु रह रहे थे, जिनको समतलीकरण के समय जमीन के अंदर ही गाड़ दिया गया। संतों ने जताया गुस्सा दादू पंथी संत चेतन दास का कहना है कि ये जगह तो दादू संप्रदाय का मोक्ष और साधना स्थल है। यहां पर उन्होंने अपना शरीर त्यागा था। इस पहाड़ से कुछ दूरी पर रीको अपना काम करे, हमें कोई परेशानी नहीं है। हमारी मोक्ष स्थली पर हमला क्यों कर रहे हैं? भैराणा धाम के संत रामरतनदास कहते हैं, हम विकास का विरोध नहीं कर रहे हैं। हमारा विरोध तो विनाश को लेकर है। ये ऐसी जगह थी जहां पर आज से कुछ महीने पहले पक्षी कलरव करते थे। रीको ने उन जंतुओं को समतलीकरण के दौरान जिंदा ही जमीन में गाड़ दिया। अग्नितप के दौरान कुछ संत बेहोश हो रहे थे, पूछने पर संत गोविंद दास जी कहते हैं कि तप करने वाले साधु जीवित समाधि भी ले सकते हैं। अगर ये जगह नहीं बची तो हम पीछे नहीं हटेंगे। हम मरने से नहीं डरते हैं। परोपकार ही संत का जीवन होता है। साधु-संतों ने हमेशा पर्यवरण के लिए संघर्ष किया है। इसलिए प्राण भी देने पड़े तो पीछे नहीं हटने वाले हैं। क्या कहती है राजस्थान हिल्स पॉलिसी 2024 जहां रीको द्वारा इन्वेस्टमेंट जोन बनाया जा रहा है, वहां चारों तरफ अरावली पर्वतमाला की शृंखला है। दादू दयाल धाम के ऊपर की पहाड़ी से निकलने वाला बरसाती नाला भी बह कर नीचे तक जाता है। राजस्थान हिल्स पॉलिसी 2024 के तहत किसी भी बरसाती नाले का रास्ता रीको द्वारा अवरुद्ध नहीं किया जा सकता। वहीं पहाड़ी के आधार की दूरी से 30 मीटर तक नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया जाना जरुरी है। जहां पर इवेस्टमेंट जोन बनाया जा रहा है वहां पर चारों तरफ अरावली पर्वतमाला की शृंखलाएं हैं। चोटियों की ऊंचाई 100 मीटर से अधिक है। इसको लेकर भैराणा धाम संघर्ष समिति ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामले को ले जाने की बात भी कही है। अग्नि तप कर रहे संतों और संघर्ष समिति ने सरकार को 2 मई का अल्टीमेटम दिया है। समिति के अनुसार अगर कोई फैसला नहीं लिया जाता है तो बड़े स्तर पर आंदोलन का आह्वान किया जाएगा। वहीं संतों ने अग्नि तप के साथ आत्म दाह की चेतावनी भी दी है। रीको मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं संतों के अग्नि-तप और धरने को लेकर रिपोर्टर ने रीको के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आकाश तोमर से बात की तो पहले उन्होंने बात को टालते हुए डीएम से बात करने को कहा। इसके बाद सोमवार को आने की बात कही। सोमवार को कई बार फोन करने के बाद भी अटैंड नहीं किया। इसके बाद रिपोर्टर ने रीको के ऑफिस जाकर बात करनी चाही तो इंतजार के लिए कहा गया। कई घंटे इंतजार के बाद भी उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।