जैसलमेर में सोमवार को तेज आंधी और तूफान से 132 केवी बिजली लाइन के 8 टॉवर गिरने के बाद मोहनगढ़ पीएचईडी नहरी हैडवर्क्स की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। इसके चलते शहर की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो गई है और लोगों को कम से कम 24 घंटे की देरी से पानी मिलेगा। डिस्कॉम और जलदाय विभाग की टीमें बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए तेजी से काम कर रही है। विभाग ने लोगों से पानी का सीमित और किफायत से उपयोग करने की अपील की है। आंधी से 132 केवी लाइन के 8 टॉवर गिरे, बिजली सप्लाई ठप तेज आंधी और तूफान से बिजली और पानी की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई। जेसूराणा और भैरवा गांव के पास 132 केवी विद्युत लाइन के कुल 8 टॉवर गिर गए। इससे मोहनगढ़ पीएचईडी (PHED) नहरी हैडवर्क्स की बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई। पहले 7 टॉवर गिरे, फिर अगले दिन एक और टॉवर क्षतिग्रस्त हुआ जलदाय विभाग के सहायक अभियंता देवीलाल भील ने बताया - 4 जुलाई की रात आए चक्रवाती तूफान और तेज आंधी से जेसूराणा गांव के पास 132 केवी लाइन के 7 बड़े टॉवर ताश के पत्तों की तरह गिर गए। इससे पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई। इसके बाद सोमवार दोपहर फिर मौसम बिगड़ा और तेज आंधी में भैरवा गांव के पास स्थित 132 केवी जीएसएस का एक और टॉवर क्षतिग्रस्त हो गया। लगातार दो दिनों में हुए इन हादसों से बिजली तंत्र पूरी तरह चरमरा गया। मोहनगढ़ हैडवर्क्स बंद, शहर में पानी की सप्लाई प्रभावित बिजली बंद होने का सीधा असर मोहनगढ़ स्थित पीएचईडी नहरी हैडवर्क्स पर पड़ा। बिजली नहीं मिलने से वहां के पंप बंद हो गए और पानी की लिफ्टिंग रुक गई। इसके कारण जैसलमेर शहर के जलाशयों और स्टोरेज टैंकों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जलदाय विभाग के अनुसार शहर में पेयजल आपूर्ति कम से कम 24 घंटे की देरी से होगी, जिससे हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बिजली कंपनी (डिस्कॉम) और जलदाय विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं। गिरे हुए टॉवर हटाने और वैकल्पिक व्यवस्था से बिजली आपूर्ति शुरू करने के प्रयास युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि भीषण गर्मी और रेतीले इलाके की कठिन परिस्थितियों के बावजूद जल्द से जल्द बिजली और पानी की व्यवस्था सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। पानी बचाकर इस्तेमाल करने की अपील की जलदाय विभाग ने लोगों से अपील की है कि जब तक पानी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक घरों में उपलब्ध पानी का उपयोग सोच-समझकर और जरूरत के अनुसार ही करें। विभाग का कहना है कि इससे पानी की कमी के दौरान लोगों को कम परेशानी होगी।