जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ स्थित इंदिरा गांधी नहर की माइनर से सोमवार रात को पकड़ा गया 10 फीट लंबा घड़ियाल अब सुरक्षित पंजाब पहुंच गया है। जैसलमेर वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू के बाद इसे पंजाब के छतबीड़ चिड़ियाघर के लिए रवाना किया था। DFO देवेंद्र सिंह के अनुसार, लंबे सफर की थकान और रेस्क्यू के दौरान हुई घबराहट से उबरने के लिए इसे करीब हफ्तेभर तक चिड़ियाघर में ही रखा जाएगा। वहां पशु डॉक्टरों की देखरेख में इसके स्वास्थ्य की जांच की जाएगी और सही खुराक देकर इसे सामान्य माहौल में ढाला जाएगा। एक हफ्ते बाद जब घड़ियाल पूरी तरह सेहतमंद और एक्टिव हो जाएगा, तब इसे पंजाब की ब्यास नदी में छोड़ दिया जाएगा, जहां यह सुरक्षित रह सकेगा। मोहनगढ़ माइनर से सोमवार रात हुआ था रेस्क्यू यह घड़ियाल पिछले करीब एक महीने से मोहनगढ़ इलाके की माइनर नहर में घूम रहा था। नहर के आसपास बसे ग्रामीणों और किसानों में इसकी मौजूदगी से भारी डर बना हुआ था। लोग खेतों में पानी लगाने और नहर के पास जाने से डर रहे थे। सूचना मिलने पर जैसलमेर वन विभाग की टीम ने सोमवार रात को घेराबंदी कर करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इसे बिना कोई चोट पहुंचाए सुरक्षित पकड़ लिया था। डीएफओ बोले- सफर की घबराहट दूर करना जरूरी डीएफओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि जैसलमेर से पंजाब तक का लंबा रास्ता तय करने और पकड़े जाने के दौरान वन्यजीव काफी तनाव में आ जाते हैं। इसीलिए इसे सीधे ब्यास नदी में न छोड़कर पहले छतबीड़ चिड़ियाघर लाया गया है। चिड़ियाघर में डॉक्टर इसकी चोटों और सेहत की पूरी जांच करेंगे। हफ्तेभर में जैसे ही यह पूरी तरह ठीक हो जाएगा, इसे ब्यास नदी संरक्षण क्षेत्र में रिलीज कर दिया जाएगा। ब्यास नदी ही क्यों चुनी गई? वन अधिकारियों के मुताबिक, पंजाब की ब्यास नदी घड़ियालों के रहने और उनके कुनबे को बढ़ाने के लिए सबसे सुरक्षित और बेहतरीन जगह मानी जाती है। वहां पहले से ही कई घड़ियाल सुरक्षित माहौल में रह रहे हैं। जैसलमेर की नहर से रास्ता भटककर आए इस घड़ियाल के लिए ब्यास नदी का जलीय वातावरण सबसे अनुकूल साबित होगा।