जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झालावाड़ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह मृतक कालूराम लोधा की नॉमिनी पत्नी शांतिबाई को 10 लाख रुपए की बीमित राशि का भुगतान करे। यह भुगतान आयोग के निर्णय की तिथि से 45 दिनों के भीतर करना होगा। आयोग के अध्यक्ष ईश्वरी लाल वर्मा और सदस्य वीरेंद्र सिंह रावत की पीठ ने शांतिबाई के परिवाद को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। कालूराम लोधा का ग्राम सेवा सहकारी समिति, आंवलहेड़ा में बचत खाता था और उन्होंने एक दुर्घटना बीमा पॉलिसी ले रखी थी, जिसकी बीमित राशि 10 लाख रुपए थी। इस पॉलिसी में शांतिबाई को नॉमिनी बनाया गया था। घटना 24 जनवरी 2022 को हुई थी, जब शांतिबाई अपने पति कालूराम और पुत्र हरकचंद के साथ बाइक पर जा रही थीं। गरबोलिया घाटी के पास मान्याखेड़ी की ओर से आ रहे एक लोडिंग ऑटो चालक ने तेज गति और लापरवाही से बाइक को टक्कर मार दी। इस हादसे में तीनों घायल हो गए थे। उपचार के दौरान झालावाड़ अस्पताल में कालूराम को मृत घोषित कर दिया गया। पति की मौत के बाद शांतिबाई ने बीमा क्लेम प्रस्तुत किया। हालांकि, बीमा कंपनी ने 31 जुलाई 2024 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय बाइक पर तीन व्यक्ति सवार थे। इसके बाद शांतिबाई ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। आयोग ने दोनों पक्षों की बहस और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण किया। आयोग ने बीमा कंपनी के क्लेम खारिज करने के निर्णय को अनुचित ठहराया और भुगतान के आदेश दिए। बीमित राशि के अतिरिक्त, बीमा कंपनी को मानसिक संताप के लिए 20 हजार रुपए और परिवाद खर्च के रूप में 10 हजार रुपए भी अदा करने होंगे। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि परिवाद दायर करने की तिथि 6 फरवरी 2025 से भुगतान प्राप्ति तक 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी दिया जाए। इस प्रकार, शांतिबाई को बीमित राशि, ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति और परिवाद खर्च सहित समस्त भुगतान 45 दिनों के भीतर प्राप्त करने का अधिकार होगा।